नेशनल डिफ़ेंस कॉलेज निशाने पर थाः एफ़बीआई
अमरीकी जाँच एजेंसी एफ़बीआई ने शिकागो में गिरफ़्तार किए गए डेविड कोलमैन हेडली और तहव्वुर हुसैन राणा पर भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज पर हमला करने की साजिश का आरोप लगाया है.
एफ़बीआई यानी फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन ने ये आरोप शिकागो की एक अदालत में एक सुनवाई के दौरान लगाए हैं.
जाँच एजेंसी के मुताबिक ये साज़िश पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा ने रची थी. एफ़बीआई का कहना है कि डेनमार्क के एक समाचारपत्र कार्यालय पर भी हमला करने की योजना थी.
दिल्ली में भारत की विदेश सचिव निरुपमा राव ने इस ख़बर के बारे में पत्रकारों को अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में अभी विस्तृत जानकारी नहीं मिली है लेकिन सरकार की ओर से यह बात लगातार कही जाती रही है कि भारत को सीमापार से चरमपंथी हमलों का ख़तरा बना हुआ है.
वकील का खंडन
शिकागो की एक अदालत में दोनों अभियुक्तों ने ज़मानत की अर्ज़ी दी है जिसकी सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा कि 'राणा समाज के लिए ख़तरा हैं और ज़मानत पर छूटने के बाद वो अमरीका के बाहर जा सकते हैं.'
अभी इस मामले की सुनवाई चल रही है. अगर आरोप सही साबित हुए तो तहव्वुर राणा को अधिकतम 30 वर्षों की क़ैद हो सकती है.
वहीं राणा के वकील का कहना है कि 'एफ़बीआई के पास राणा पर आरोप साबित करने के लिए साक्ष्य नहीं है और उनका इस साज़िश से कोई वास्ता नहीं है.'
राणा और अमरीकी नागरिक हेडली दोनों स्कूल के समय के दोस्त हैं. राणा का जन्म पाकिस्तान में हुआ लेकिन अब वे शिकागो के निवासी हैं.दोनों को डेनमार्क और भारत में हमला करने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है.
जाँच एजेंसी के मुताबिक राणा और हेडली के बीच सात सितंबर को फ़ोन पर बातचीत हुई थी जिसे एफ़बीआई ने रिकॉर्ड कर लिया था.
एफ़बीआई के अनुसार इस बातचीत में ही भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज पर हमला करने का ज़िक्र है. इस मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी.


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