पाक पहले आतंकवादी ढांचों को नष्ट करे, तभी संवाद संभव : भारत (राउंडअप)

रक्षा अध्ययन और विश्लेषण संस्थान (आईडीएसए) द्वारा दक्षिण एशिया पर आयोजित एक सम्मेलन में भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा, "हमने पाकिस्तान के साथ अर्थपूर्ण वार्ता की अपनी इच्छा कई बार प्रकट की है, परंतु कोई भी अर्थपूर्ण वार्ता केवल उसकी धरती पर आतंकवादी ढांचा नष्ट होने के बाद ही संभव है।"

उन्होंने कहा कि अपनी धरती का उपयोग भारत विरोधी आतंकवादी कार्रवाइयों के लिए नहीं होने देने के अपने वादे को पाकिस्तान को पूरा करना चाहिए।

दक्षिण वजीरिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने में भारत का हाथ होने के पर्याप्त सबूत होने के पाकिस्तान के दावे के बारे में संवाददाताओं के प्रश्नों के जवाब में राव ने कहा, "इन आरोपों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। हम हमेशा पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं।"

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता अतहर अब्बास ने मंगलवार को दावा किया था कि पाकिस्तान के पास इस बात को साबित करने के पर्याप्त सबूत हैं कि दक्षिणी वजीरिस्तान में आतंकवादियों को भारत धन उपलब्ध करा रहा है।

राव ने यह भी कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन द्वारा बांध के निर्माण संबंधी मुद्दे को भारत सरकार ने चीनी सरकार के समक्ष कई बार उठाया है लेकिन उसने बार-बार इससे इंकार किया है।

उन्होंने संवाददाताओं को बताया, "हमने चीन के साथ इस मुद्दे को कई बार उठाया है। चीन हर बार ऐसे किसी बांध के निर्माण से इंकार करता रहा है।"

इससे पहले मीडिया में एक खबर आई थी कि 'नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी' (एनआरएसए) द्वारा इस बात की पुष्टि की गई थी कि चीन झांगमू में ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध का निर्माण कर रहा है। संवाददाताओं की ओर से विदेश सचिव से इसी संबंध सवाल पूछे गए थे।

भारत यह चिंता जताता रहा है कि चीन द्वारा बांध का निर्माण कराने से ब्रह्मपुत्र नदी में जल का प्रवाह रुक जाएगा। उसका यह भी मानना है कि नदियों को लेकर किसी द्विपक्षीय संधि के न होने की स्थिति में यह अनुचित भी है।

तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा की अरूणाचल प्रदेश यात्रा को लेकर चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों में किसी तनाव से इंकार करते हुए राव ने कहा कि आने वाले दिनों में भारत-चीन संबंध अधिक मजबूत और प्रासंगिक होंगे।

दलाई लामा की आठ नवंबर को तय अरूणाचल प्रदेश यात्रा से दोनों देशों के संबंध प्रभावित होंगे या नहीं, संवाददाताओं के यह पूछे जाने पर विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा, "द्विपक्षीय संबंधों में कोई तनाव नहीं है।"

राव ने कहा कि इस मामले में भारत की स्थिति बहुत स्पष्ट है। पिछले पांच दशकों से देश में निर्वासित जीवन बिता रहे दलाई लामा भारत में कहीं भी जा सकते हैं। वह राजनीतिक गतिविधियों में शामिल नहीं हैं।

चीन के साथ संबंधों को 'जटिल' बताते हुए राव ने कहा कि अनसुलझे मुद्दों के बावजूद भारत और चीन के संबंध आने वाले दिनों में अधिक गतिशील और प्रासंगिक होंगे।

राव ने संकेत दिया कि सीमा विवाद जैसे मुद्दों को सुलझने में कुछ समय लगेगा। इसके लिए दोनों देशों में और बड़ी राजनीतिक इच्छा की जरूरी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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