पीजीआईएमईआर ने मरीज की मौत से पल्ला झाड़ा, मृतक के परिवार ने मुआवजा मांगा

प्रधानमंत्री की यात्रा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर अस्पताल में दाखिल होने की अनुमति न मिल पाने की वजह से गुर्दे के काम करना बंद कर देने और अन्य जटिलताओं के बाद 32 वर्षीय सुमित प्रकाश वर्मा की मंगलवार को 'पोस्ट-ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडीकल एजुकेशन एंड रिसर्च' (पीजीआईएमईआर) के बाहर मृत्यु हो गई थी।

वर्मा को यहां से 45 किलोमीटर दूर स्थित अम्बाला से इलाज के लिए लाया गया था। उनके पीछे उनकी पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं।

मृतक के परिवार ने मांग की है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था के चलते इलाज के लिए पीजीआईएमईआर पहुंचने में हुई देरी के कारण हुई वर्मा की मौत के लिए उन्हें मुआवजा दिया जाए और उनके एक बच्चे की नौकरी की व्यवस्था की जाए।

वर्मा के रिश्तेदार धीरज ने कहा, "हम चाहते हैं कि सरकार परिवार के लिए कुछ करे।"

संस्थान के 30वें दीक्षांत समारोह में पहुंचे प्रधानमंत्री के पीजीआईएमईआर के शिक्षकों और चिकित्सकों से आम आदमी के आने-जाने पर रोक नहीं लगाने के लिए कहने के बावजूद कई लोगों ने वहां नहीं पहुंचने देने की शिकायत की है।

पीजीआईएमईआर के मुख्य सुरक्षा अधिकारी पी. सी. शर्मा का कहना है कि प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान किसी भी मरीज को संस्थान में आने से नहीं रोका गया था। अधिकारी के इस वक्तव्य ने विवाद बढ़ा दिया है।

शर्मा ने आईएएनएस से कहा, "हो सकता है कि उन्हें गलत प्रवेश द्वार के पास भेज दिया गया हो। किसी को भी पीजाआईएमईआर में प्रवेश करने से नहीं रोका गया था।"

चण्डीगढ़ पुलिस का भी दावा है कि मरीज की कार को नहीं रोका गया था।

वर्मा को मंगलवार की सुबह यहां के एक निजी अस्पताल में लाया गया था जहां उनकी स्थिति गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें पीजीआईएमआर ले जाने की सलाह दी थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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