जयपुर के आईओसी डिपो में मंद हुई आग

जयपुर से 20 किलोमीटर दूर स्थित सीतापुर के दो से तीन किलोमीटर के दायरे में काले धुंए का विस्तार देखा जा सकता है। गत 29 अक्टूबर को डिपो के जिन 11 टैंकों में आग लगी थी, उनमें से दो टैंक अभी भी जल रहे हैं। इस दुर्घटना में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है और 150 लोग घायल हो चुके हैं।

डिपो से दो किलोमीटर की दूरी पर रहने वाले एक नागरिक राजेश भारद्वाज ने बुधवार को आईएएनएस को बताया, "मेरी आंखों में खुजली हो रही है। मुझे सांस लेने में भी दिक्कत हो रही है।"

जयपुर के सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि धुंए के कारण दुर्घटना स्थल के आसपास रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।

एक चिकित्सक ने कहा, "आसपास की कॉलोनियों से हमारे पास मुख्यरूप से आंख, त्वचा और श्वांस की समस्या से संबंधित मामले आ रहे हैं।"

चिकित्सक गर्भवती महिलाओं को प्रदूषित इलाके से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं। एक चिकित्सक ने कहा, "बेहतर होगा यदि गर्भवती महिलाएं प्रदूषित इलाके से दूर रहें, क्योंकि इससे गर्भस्थ शिशु का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।"

नजदीक के सीतारामपुरिया और सुखपुरिया गांवों में बच्चों में बुखार और उल्टी की शिकायतें सामने आ रही हैं।

अनुज नामक दो वर्षीय बच्चे की मां सुगना ने कहा है, "मेरे बच्चे को पिछले तीन दिनों से उल्टियां हो रही है। उसे तेज बुखार भी है और उसकी आंखों में जलन हो रही है। डिपो की आग के कारण ही यह सब हो रहा है।"

राज्य स्वास्थ्य व चिकित्सा विभाग के एक अधिकारी ने कहा है, "दुर्घटना स्थल के आसपास के इलाकों में हमने आठ सचल स्वास्थ्य दल तैनात किए हैं। हमने उनसे उन इलाकों में भी जाने के लिए कहा है जहां पिछले कुछ दिनों से धुंआ फैला हुआ है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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