बच्चों की देखभाल में अन्य देशों से पीछे है भारत: ह्यूमन राइट्स वाच

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि मातृ स्वास्थ्य में प्रगति के लिए प्रसव जटिलताओं वाली महिलाओं की प्रसव के दौरान उचित देखभाल सुनिश्चित करना होगी।

ह्यूमन राइट्स वाच (एचआरडब्ल्यू) के एक वक्तव्य में कहा गया है, "एचआरडब्ल्यू के अनुसंधान से स्पष्ट है कि ग्रामीण महिलाओं के लिए निशुल्क प्रसूति देखभाल सुनिश्चित करने वाले स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू करने के बाद भी भारत में ऐसा नहीं हो रहा है।"

एचआरडब्ल्यू में महिला अधिकार विभाग के अनुसंधानकर्ता अरुण कश्यप का कहना है, "महिलाओं के यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य की रक्षा व निगरानी के क्षेत्र में भारत को अगुवाई करना चाहिए। अब भी महिलाओं की ऐसे मामलों में मृत्यु हो रही है जहां मौतें रोकी जा सकती हैं और स्वास्थ्य अधिकारी अब तक इसके कारणों का या स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए आवश्यक उपायों का पता नहीं लगा सके हैं।"

एचआरडब्ल्यू के अनुसार सरकार स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में प्रसव संख्या की गिनती करती है लेकिन इसमें संसाधनों और कर्मचारियों की कमी आड़े आती है। इन परिस्थितियों में जन्म देने के बाद कई महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानियों की वजह से मौत हो जाती है।

संस्था का दावा है कि भारत सरकार बच्चों के जन्म के बाद महिलाओं के स्वास्थ्य की निगरानी नहीं करती है। प्रसव के बाद 24 से 72 घंटे के महत्वपूर्ण समय में महिलाओं के मरने की संभावना सबसे अधिक होती है।

गर्भावस्था के दौरान परेशानियों का सामना करने वाली महिलाओं को उनके लिए आवश्यक सही उपचार मिल रहा है या नहीं और वह बच्चे के जन्म के बाद जीवित हैं अथवा नहीं यह जांचने के लिए संस्था ने भारत सरकार को अपना दृष्टिकोण बदलने का सुझाव दिया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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