'निचले स्तर' पर लिया गया श्रीनगर में नहीं खेलने का फैसला : पल्लम राजू
राजू ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "मेरा मानना है कि सेना टीम का यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है और यह बात निचले स्तर पर तय की गई थी। हर एक संस्थान और देश को सुरक्षा को ध्यान में रखकर कहीं खेलने या नहीं खेलने का फैसला लेना होता है। इसी अधिकार के तहत सर्विसेज स्पोर्ट्स बोर्ड ने श्रीनगर में नहीं खेलने का फैसला किया।"
राजू ने हालांकि तीनों सेनाओं का प्रतिनिधित्व कर रही इस टीम के इस फैसले के लिए किसी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराने से इंकार किया।
उल्लेखनीय है कि सेना टीम को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में मेजबान जम्मू एवं कश्मीर की टीम के साथ मंगलवार से चार दिवसीय मैच खेलना था लेकिन यह टीम मैच के लिए निर्धारित वक्त पर श्रीनगर नहीं पहुंची।
सेना को हालांकि अपने इस रुख का खामियाजा भुगतना पड़ा क्योंकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे इस वर्ष की रणजी चैम्पियनशिप से बाहर कर दिया।
राजू से जब यह पूछा गया कि आखिर क्या कारण है कि ऐसे में जबकि राज्य में चार लाख के करीब सैनिक तैनात हैं, 11 खिलाड़ी वहां खेलने को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, राजू ने कहा कि अगर बीसीसीआई के नियंत्रण में काम करने वाली रणजी समिति ने मौका दिया तो सेना की टीम को दोबारा श्रीनगर भेजा जाएगा।
सेना टीम के इस फैसले से नाराज जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य के क्रिकेट संघ के प्रमुख फारुक अब्दुल्ला ने मंगलवार को इस मुद्दे को कैबिनेट की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री के सामने उठाने की बात कही थी।
घाटी में पांच साल बाद होने वाले इस रणजी मैच को लेकर सेना टीम के रुख से आहत फारुक ने कहा था, "सेना का यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। उसकी नजर में कश्मीर सुरक्षित नहीं है। क्या हम विश्व स्तर पर कश्मीर की यह छवि पेश करना चाहते हैं। सेना की इस हरकत से दुनिया भर में क्या संदेश जाएगा। मैं इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से बात करुं गा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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