जनजातियों को मिले विकास के लाभ : प्रधानमंत्री (लीड-1)

नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आधुनिक आर्थिक प्रक्रियाओं में जनजातीय लोगों को हिस्सेदार बनाने में व्यवस्था की विफलता और उनकी बसावट वाले इलाकों में निर्दय घुसपैठ की बात स्वीकार करते हुए जनजातियों तक विकास के लाभ पहुंचाने पर जोर देने को कहा।

राज्यों के मुख्यमंत्रियों तथा वन और जनजातीय विकास मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों से जारी अलगाव ने देश के कुछ हिस्सों में खतरनाक रूप अख्तियार कर लिया है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में जनजातीय समुदायों का शोषण तथा सामाजिक, आर्थिकभेदभाव लंबे समय तक सहन नहीं किया जा सकता। परंतु यह भी सच है कि बंदूकों के सहारे इसका कोई स्थाई हल संभव नहीं है, न ही जनजातियों के हितों के लिए बोलने का दावा करने वालों ने कोई वैकल्पिक आर्थिक या सामाजिक रास्ता सुझाया है, जो व्यवहार्य हो। हिंसा के रास्ते से केवल आम आदमी की तकलीफें ही बढ़ेंगी।

मनमोहन सिंह ने कहा, "हम इस खतरे को समाप्त करेंगे। जहां एक ओर हिंसा सहन नहीं की जा सकती, वहीं जनजातियों को विकास प्रक्रिया के लाभों में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हम उनके दिलों की लड़ाई जीतेंगे।"

विकास प्रक्रिया में जनजातीय समुदायों को शामिल करने पर जोर देते हुए सिंह ने राज्य सरकारों से व्यवस्था की वजह से शोषण के शिकार लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने का आग्रह किया।

सिंह ने कहा, "राज्यों को जनजातीय समुदायों के जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास करना चाहिए। विकास प्रक्रिया से उनको जोड़ना बहुत महत्वपूर्ण है। परंतु यह शोषण का एक साधन नहीं बनना चाहिए न ही यह उनकी विशिष्ट पहचान या संस्कृति की कीमत पर होना चाहिए।"

सम्मेलन का आयोजन वन अधिकार कानून, 2006 और जनजातीय विकास और कल्याण कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए किया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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