विविधताओं और विवादों के साथ खत्म हुआ जमीयत का 30वां जलसा-ए-आम (राउंडअप)

इस सम्मेलन के दूसरे दिन प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के खिलाफ एक तरह से फतवा जारी किया जिसे लेकर विवाद आरंभ हो गया, वहीं आखिरी दिन योग गुरु बाबा रामदेव और जानेमाने सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश तथा केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम को आमंत्रित कर इन विविधताओं के बीच बदलाव के भी संकेत दिए।

सम्मेलन में न सिर्फ आतंकवादियों और नक्सलियों से हथियार डालने का आग्रह किया गया बल्कि उन्हें यह आश्वासन भी दिया कि यदि आतंकवादी और नक्सली ऐसा करते हैं तो वे उनके समर्थन में लड़ाई लड़ेंगे। चिदम्बरम ने इस आग्रह का स्वागत किया है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद की वार्षिक आमसभा को संबोधित करते हुए जमीयत के संयोजक मौलाना मेहमूद मदनी ने कहा, "यदि आतंकवादी और नक्सली हिंसा छोड़ देते हैं तो हम उनका स्वागत करेंगे। मैं उन्हें आश्वस्त करना चाहूंगा कि हम उनके समर्थन में लड़ाई लड़ेंगे।"

चिदम्बरम से इस बारे में जब पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मैं इस आग्रह का सम्मान करता हूं। यह सिर्फ मुसलमानों का ही नहीं, सही सोच रखने वाले देश के हर नागरिक का कर्तव्य है।"

चिदम्बरम ने आधुनिक भारत के निर्माण में अल्पसख्यकों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि कोई भी देश अल्पसंख्यकों की उपेक्षा की जोखिम नहीं उठा सकता है।

उन्होंने कहा, "किसी भी राष्ट्र के द्वारा अल्पसंख्यकों की उपेक्षा करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। अल्पसंख्यकों की रक्षा करना बहुसंख्यकों का कर्तव्य है, चाहे वे धार्मिक, नस्लीय या फिर भाषाई अल्पसंख्यक ही क्यों न हो। यही लोकतंत्र का स्वर्णिम सिद्धांत है।"

चिदम्बरम ने कहा, "हम इस्लाम को विदेशी नहीं मानते। हमारे मुसलमान भाई इस देश के सम्मानित नागरिक हैं। यह आपके पूर्वजों की भूमि है। यह आपकी जन्मभूमि है जहां आप रहते हैं और काम करते हैं।"

उन्होंने कहा, "यह हमारे लिए गर्व की बात है कि इस्लाम सहित विश्व के सभी धर्मो के लोग यहां रहते हैं।"

साम्प्रदायिकता की निंदा करते हुए उन्होंने कहा, "साम्प्रदायिक हिंसा भड़काना साम्प्रदायिकता का सबसे बुरा रूप है। किसी भी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए हिंसा फैलाना सभ्य समाज के खिलाफ है।"

चिदम्बरम ने कहा, "बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना धार्मिक कट्टरता और अति पूर्वाग्रह का नतीजा थी। ठीक इसी तरह धर्म के नाम पर हिंसा का सहारा लेने को भी धार्मिक कट्टरता और अति पूर्वाग्रह कहा जाना चाहिए।"

इस सम्मेलन में प्रसिद्ध योग गुरु बाबा रामदेव को विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया था। उन्होंने देवबंद में हजारों की संख्या में पहुंचे मौलवियों को योग को लेकर फैली तरह-तरह की भ्रांतियों से अवगत कराया और उन्हें योग के जरिए बेहतर स्वास्थ्य पाने का पाठ भी पढ़ाया।

इस सम्मेलन में शिरकत करने वाले बाबा रामदेव पहले गैरमुस्लिम धार्मिक नेता हैं।

इस मौके पर साम्प्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए बाबा ने कहा कि हिन्दू और मुसलमानों की एकता ही देश की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा, "लोगों को अब स्वीकार कर लेना चाहिए कि ईश्वर और अल्लाह एक ही सर्वशक्तिमान के दो नाम हैं।"

योग के महत्व को समझाते हुए बाबा ने इसके बारे में फैली विभिन्न भ्रांतियों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, "योग किसी धर्म से संबंधित नहीं है और न ही इसके पीछे किसी धर्म विशेष को प्रोत्साहित किए जाने का विचार है। यह शरीर और दिमाग को तंदुरूस्त रखने की एक शारीरिक क्रिया है।"

बाबा ने इस मौके पर प्राणायाम और कपाल भाती तथा अनुलोम-विलोम के बारे में सम्मेलन में मौजूद मौलवियों को विस्तार से बताया।

स्वामी अग्निवेश ने शराब पर प्रतिबंध लगाने और मुसलमानों से वंदे मातरम गीत न गाने की बात कहकर खूब तालियां बटोरी। अग्निवेश, बाबा रामदेव, चिदम्बरम के अलावा इस सम्मेलन में दूरसंचार राज्यमंत्री सचिन पायलट और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ महासचिव मौलाना कल्बे सादिक भी सम्मिलित हुए।

इस सम्मेलन के पहले दिन राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के खिलाफ फतवा जारी किए जाने से एक बार फिर इस मुद्दे पर राजनीति गरमाने लगी है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसका कड़ा विरोध किया है और इसे राष्ट्र विरोधी करार दिया है। पार्टी का मानना है कि ऐसे फतवे देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा हैं और इनसे अलगाववाद को बढ़ावा मिलेगा। पार्टी ने तो इस सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम के सम्मिलित होने पर ही सवाल उठाए हैं।

भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने नई दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "जब चिदम्बरम को यह मालूम हो गया था कि वंदे मातरम के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के साथ जमीयत का सम्मेलन शुरू हुआ है तो वह उस सम्मेलन में क्यों गए। उनकी आखिर क्या मजबूरी थी कि वह सम्मेलन में गए।"

उन्होंने कहा कि चिदम्बरम को इस सम्मेलन का बहिष्कार करना चाहिए था लेकिन बहिष्कार की बजाए उन्होंने सम्मेलन में न सिर्फ हिस्सा लिया बल्कि भाषण भी दिया और वंदे मातरम को लेकर पारित प्रस्ताव पर उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा।

नकवी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चिदम्बरम को देश को यह बताना चाहिए चाहिए कि आखिर किन मजबूरियों के चलते वह इस सम्मेलन में गए। कांग्रेस नेताओं के इसी तरह के रवैये की वजह से अलगावादियों और आतंकवादियों को बल मिलता है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्रा ने लखनऊ में संवाददाताओं से चर्चा में कहा, "हम इस फतवे का विरोध करते हैं। ऐसे किसी भी फतवे को हम स्वीकार नहीं करेंगे। वे हमारे राष्ट्रीय मूल्यों के खिलाफ हैं।"

उन्होंने कहा, "यह फतवा हमारी राष्ट्रीय एकता के खिलाफ है। हम सभी को इसके विरोध में एकजुट होना चाहिए।"

कलराज ने वंदे मातरम को भारत माता की वंदना करार देते हुए कहा कि यह मुल्क परस्ती को मजबूती प्रदान करने वाला है। उन्होंने कहा कि यह फतवा देश के अंदर अलगाववादी ताकतों को प्रोत्साहित करेगा।

मालूम हो कि देवबंद में जमीयत उलेमा हिंद के वार्षिक सम्मेलन में सोमवार को एक प्रस्ताव पारित कर वंदे मातरम के खिलाफ फतवा जारी किया गया था। इस मौके पर उलेमाओं ने कहा था कि मुसलमानों को वंदे मातरम नहीं गाना चाहिए।

भाजपा की उत्तरप्रदेश इकाई के अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम का मंगलवार को इस अधिवेशन में शामिल होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे साफ होता है कि अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए कांग्रेस को राष्ट्रविरोधी संगठनों से समझौता करने से कोई परहेज नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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