महाराष्ट्र में गतिरोध जारी, राकांपा ने अब बाहर से समर्थन देने का पासा फेंका (लीड-2)

महाराष्ट्र के राज्यपाल एस. सी. जमीर ने भी सरकार गठन के लिए कांग्रेस व राकांपा के बीच जारी गतिरोध तोड़ने की कोशिश की लेकिन वह उसमें असफल रहे। जमीर ने मनोनीत मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और राकांपा विधायक दल के नेता छगन भुजबल को राजभवन बुलाकर अलग-अलग चर्चा की। दोनों पार्टियां सत्ता में भागीदारी को लेकर अपनी-अपनी जिद पर अड़ी हैं।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद भुजबल ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान अपनी पार्टी की शर्ते दोहराते हुए सरकार के गठन में देरी के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "सरकार गठन में कांग्रेस देरी कर रही है, राकांपा नहीं।"

भुजबल ने कहा, "मैंने राज्यपाल को बताया कि समर्थन का हमारा पत्र तैयार है। अब यह कांग्रेस पर निर्भर है कि वह सरकार के गठन के लिए पहल करे।"

उन्होंने कहा कि वर्ष 1999 के फार्मूले के मुताबिक कांग्रेस यदि सरकार गठन पर सहमत नहीं हुई तो राकांपा सरकार में शामिल होने की बजाए बाहर से उसे समर्थन देगी।

राज्यपाल ने इससे पहले सरकार के गठन को लेकर पिछले 13 दिनों से जारी गतिरोध को तोड़ने की कोशिश के तहत चव्हाण से भी आधे घंटे तक बातचीत की थी।

उल्लेखनीय है कि वर्तमान विधानसभा के कार्यकाल का बुधवार अंतिम दिन है। मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिव सेना गठबंधन ने कहा है कि मंगलवार तक यदि सरकार का गठन नहीं हुआ तो वह राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग करेंगे।

ज्ञात हो कि 288 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस की 82 और राकांपा की 62 सीटें हैं। दोनों पार्टियां नई सरकार में विभागों के बंटवारे को लेकर अपनी-अपनी मांगों पर अड़ी हुई हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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