मानव संसाधनों की कमी से स्वास्थ्य मिशन की राह में रूकावट : प्रधानमंत्री (लीड-1)
पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) चंडीगढ़ के 44वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों की अपेक्षा अभी भी पिछड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में हमें जितना विकास करना चाहिए था उतना विकास हम नहीं कर पाए हैं।
उन्होंने कहा, "स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अन्य देशों खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों ने जो तरक्की की है, उससे हम अपनी तुलना नहीं कर सकते। हम उनसे पिछड़ गए हैं।"
उन्होंने कहा, "इस क्षेत्र में हम जितना विकास कर सकते थे, उतना विकास नहीं कर पाए। हमारा लक्ष्य है कि स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मौजूदा एक फीसदी से बढ़ाकर दो-तीन फीसदी किया जाए। इसके लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों को भी कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि एनआरएचएम की खामियों को दूर करने के लिए सरकार की ओर से कई कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, "एनआरएचएम की समीक्षा यह इंगित करती है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधनों की कमी है। यह विभिन्न स्तरों पर है, मसलन विशेषज्ञों, डाक्टरों, नर्सो और सहयोगी कर्मचारियों। सार्वजनिक स्वास्थ्य वितरण प्रणाली को मजबूत करने में यह सबसे बड़ी बाधा है।"
उन्होंने कहा, "इन खामियों को दूर करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। कम विकसित राज्यों में कई मेडिकल कॉलेजों और नर्सिग स्कूलों की स्थापना की जा रही है। शिक्षकों और छात्रों के अनुपात को भी बढ़ाया जा रहा है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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