शिक्षक ने लिखी बिना नुक्तों वाली एक अनोखी उर्दू किताब
लखनऊ, 3 नवंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक वकारुल हसनैन ने 130 पन्नों की उर्दू कविताओं की एक ऐसी पुस्तक लिखी है, जिसमें सिर्फ 14 अक्षरों का इस्तेमाल किया गया है। खास बात यह है कि इस पुस्तक में एक भी नुक्ते का प्रयोग नहीं किया गया है। यही कारण है कि वकारुल को यह पुस्तक लिखने में लगभग 10 साल लगे।
वकारुल ने अपनी इस खास पुस्तक को 'मुशायरे हिल्म' नाम दिया है। वह कहते हैं, "मेरे लिए यह अमूल्य धरोहर है। मैंने इसकी एक-एक कविता लिखने के लिए कई-कई घंटों तक सोचा है। मेरे लिए ऐसे शब्दों को खोज पाना बहुत मुश्किल था, जिनमें नुक्तों का प्रयोग नहीं हुआ हो। यही कारण है कि मैं अपनी पुस्तक में उर्दू के 36 में से सिर्फ 14 अक्षरों का प्रयोग कर सका। उर्दू में होने के कारण यह काम मेरे लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।"
वकारुल बताते हैं कि उन्होंने जब यह पुस्तक लिखनी शुरू की थी, तब उनकी उम्र 54 साल थी। वह कहते हैं, "एक वक्त तो मुझे लगा कि मैं यह पुस्तक पूरी ही नहीं कर पाऊंगा लेकिन आज मैं अपने इस प्रयास से खुश हूं। मैं इस पर गर्व कर सकता हूं।"
वकारुल ने अपनी पुस्तक को दो भाग में बांटा है। पहले भाग में गजलों को समाहित किया गया है जबकि अगले भाग में दोहे हैं। वकारुल की कविताओं में अपने प्रेमिका से बिछड़े प्रेमी की व्यथा का वर्णन है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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