अभी भी धू-धू कर जल रहा है आईओसी डिपो, मृतकों की संख्या 11 हुई (लीड-1)
डिपो में मौजूद चार टैंकरों में अभी भी आग धधक रही है, जबकि सात अन्य में आग बुझ चुकी है। एक अधिकारी ने बताया कि प्रशासन पूरी तरह से ईंधन के जलने का इंतजार कर रहा है।
दुर्घटना स्थल के दो-तीन किलोमीटर के दायरे में आसमान में काले धुएं का बादल छा गया है। गंभीर रुप से घायल एक व्यक्ति के रविवार की देर रात दम तोड़ देने के बाद मृतकों की संख्या बढ़ कर 11 हो गई है।
आधिकारिक सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि जांच दल ने घटना स्थल का दौरा किया और कुछ गवाहों से बातचीत की। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन एम.बी.लाल के नेतृत्व वाले इस जांच दल को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
क्षेत्र में स्थित उद्योगों को राहत देने के लिए राजस्थान सरकार ने 31 मार्च 2010 तक मूल्य वर्धित कर (वैट) के भुगतान से उन्हें मुक्त कर दिया है।
अधिकारी ने कहा, "फिलहाल हम पूरी तरह ईंधन के जलने का इंजतार कर रहे हैं। उससे पहले हम कुछ नहीं कर सकते हैं।"
रविवार देर रात डिपो से लगभग 200 मीटर की दूरी पर स्थित एक इलेक्ट्रीक कंपनी की छत तक आग पहुंच गई थी। आग पर काबू पाने में दो घंटे से अधिक का वक्त लगा था।
डिपो के समीप स्थित कॉलोनी में रहने वाले आदेश कुमार ने कहा, "शुक्रवार रात से मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। मैंने चिकित्सक से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि धुएं की वजह से ऐसा हो रहा है।"
जिला प्रशासन ने डिपो के समीप स्थित औद्योगिक ईकाइयों को खोलने का फैसला किया है। इन सभी को गुरुवार शाम से ही बंद कर दिया गया था। वहीं विद्यालय और महाविद्यालय भी मंगलवार से खुल जाएंगे।
आग गुरुवार शाम करीब 7.15 बजे भड़की थी। आग ने करीबी एग्रो फूड सेंटर और पावर ग्रिड को भी अपनी चपेट में ले लिया।
शुक्रवार को पेट्रोलयम मंत्री मुरली देवड़ा ने घटना स्थल का दौरा किया और सवाई मानसिंह अस्पताल में घायलों का हाल-चाल पूछा थाा। देवड़ा ने कहा था कि इंडियन ऑयल के डिपो में लगी आग में पूरे ईंधन को जलने देने के अलावा फिलहाल कोई अन्य विकल्प नहीं है।
राज्य सरकार ने आग की वजह से औद्योगिक ईकाइयों और समीप के गांवों में हुए नुकसान का आंकलन करने के लिए दो समिति गठित की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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