मधुबनी पेंटिंग्स की ओर आकर्षित हुआ मॉरीशस
एक अधिकारी ने सोमवार को जानकारी दी कि मॉरीशस के युवा, खेल, कला एवं संस्कृति मंत्रालय के तहत चलने वाले रबींद्रनाथ टैगोर संस्थान ने प्रख्यात डिजाइनर अमिताभ पाण्डे और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मधुबनी पेंटर दिवंगत यशोदा देवी के बेटे मधुबनी पेंटर राज कुमार को आमंत्रित किया था।
सोलह दिवसीय कार्यशाला में मॉरीशस के कलाकारों और कला शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
कला एवं संस्कृति विभाग के एक अधिकारी का कहना है, "मॉरीशस ने कलाकारों और कला शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए बिहार से मधुबनी पेंटिग्स के दो विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था।"
शताब्दियों से ग्रामीण लोगों, ज्यादातर महिलाओं ने बिहार के मिथिला में अपनी कला की एक परंपरा विकसित की थी। जिसे मधुबनी जिले के आधार पर मधुबनी पेंटिंग्स के नाम से जाना जाता है। पेंटिंग्स की यह परंपरा सात शताब्दी ईसा पूर्व से भी पुरानी है।
पारंपरिक तौर पर कुछ निश्चित धार्मिक उत्सवों और शादी-ब्याह के अवसर पर मधुबनी पेंटिंग्स बनाई जाती थीं। पिछले कुछ दशकों के दौरान विशेषज्ञ चित्रकारों ने मधुबनी पेंटिंग्स को विश्वभर में प्रसिद्ध कर दिया है।
अब प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग्स एक ब्रांड बन गई है। उसे 'ग्लोबल इंडिकेशन्स (जीआई) एक्ट फॉर पेंटिंग' के प्रावधानों के तहत पंजीकृत किया गया है।
मॉरीशस का बिहार के साथ मजबूत सांस्कृतिक संबंध है। मॉरीशस में रहने वाले ज्यादातर लोगों के पूर्वजों की भूमि बिहार ही थी।
पिछले साल मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने अपने बिहार दौरे के समय भारत के साथ नजदीकी सांस्कृतिक संबंध बनाने पर जोर दिया था।
रामगुलाम ने यहां पहुंचने के बाद यहां की मिट्टी को अपने माथे से लगा लिया था।
उनके दादा मोहित रामगुलाम उन हजारों मजदूरों में शामिल थे जिन्हें ब्रितानी सरकार ने 1871 में जोर-जबरदस्ती कर बिहार से मॉरीशस के गन्ना उद्योग में काम करने के लिए वहां भेज दिया था। मॉरीशस की 12 लाख की आबादी में से 60 प्रतिशत लोग भारतीय मूल के हैं। उनमें से ज्यादातर लोग बिहार के हैं और उनकी मातृभाषा भोजपुरी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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