फिर एक कश्मीरी विद्वान को चीन जाने से रोका गया
हिमालय से निकली झीलों पर शोध के लिए उन्हें प्रतिष्ठित कसुमिगौरा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह पुरस्कार लेने के लिए रविवार को उन्हें चीन जाना था।
भारतीय आव्रजन अधिकारियों ने इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उन्हें रोक लिया। दरअसल, चीनी दूतावास से उन्हें जो वीजा मिला था उसमें उन्हें भारतीय नागरिक के रूप में नहीं दिखाया गया है। ज्ञात हो कि चीन कश्मीर को एक अलग देश के रूप में देखता है और कश्मीरियों के लिए अलग वीजा जारी करता है।
रोमशू ने नई दिल्ली से एक बयान जारी कर कहा, "मुझे हवाईअड्डे पर रोक दिया गया। मैं चीन नहीं जा सका। चीन हमारी नागरिकता पर सवाल खड़े कर रहा है। वह कश्मीरियों के लिए अलग दस्तावेजों के आधार पर वीजा जारी करता है, जिसे भारती आव्रजन अधिकारी स्वीकार नहीं करते।"
उन्होंने कहा, "भारत को चीनी अधिकारियों के समक्ष इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाना चाहिए। यह बेहद गंभीर मामला है। मुझे एक प्रतिष्ठित सम्मान मिलना था लेकिन मैं इससे वंचित रह गया।"
उल्लेखनीय है कि शनिवार को कश्मीर के एक डाक्टर सलीम वानी को दिल्ली हवाईअड्डे पर आव्रजन अधिकारियों ने रोक लिया था। उन्हें एक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन जाना था। वानी पर पार्सपोर्ट के साथ छेड़छाड़ का आरोप था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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