1984 दंगों के खिलाफ सिख छात्रों ने निकाला मार्च
एआईएसएसएफ सदस्यों और दंगों से पीड़ित कुछ परिवारों ने गुरुद्वारा बंगला साहिब से जंतर मंतर तक मार्च निकाला। सिख छात्रों ने संसद से दंगों को सिखों का 'जातीय संहार' मानने की मांग भी की।
सिख छात्रों ने नारे लगाते हुए न्याय और सिख विरोधी हिंसा की साजिश रचने वालों को दंड देने की मांग की। 25 साल पहले हुए सिख विरोधी देशव्यापी दंगों में राजधानी और आसपास के शहरों में 3,000 से अधिक सिख मारे गए थे।
गौरतलब है प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के बाद दंगे भड़क उठे थे।
एआईएसएसएफ के अध्यक्ष करनैल सिंह पीरमोहम्मद ने कहा,"भारत के 110 शहरों में हजारों सिखों का संगठित तरीके से संहार किया गया और इस मामले में न सिर्फ न्याय में देरी हो रही है बल्कि न्याय देने से भी इंकार किया जा रहा है।"
पीरमोहम्मद ने कहा कि एआईएसएसएफ ऐसे राज्यों, जहां सिखों का संहार हुआ है, के उच्च न्यायालयों में जनहित याचिका दायर कर दंगों के आरोपी अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ बंद कर दिए गए मामलों को फिर से खोला जाएगा।
इसके अलावा एआईएसएसएफ सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर इस तथ्य- सरकार सिखों के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति की सुरक्षा करने में विफल रही है का संज्ञान लेने को कहेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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