मधु कोड़ा : मजदूर का बेटा भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में
पश्चिम सिंहभूम जिले के पतहातू गांव में जन्में 38 वर्षीय कोड़ा ने भी राजनीति में कदम रखने से पूर्व कुछ समय मजदूरी की थी।
कोड़ा ने वर्ष 1994 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण की। यह वह दौर था जब राज्य में कांग्रेस का प्रभाव खत्म हो रहा था। वर्ष 2000 में उन्हें विधानसभा का टिकट मिला और चुनाव जीतकर उसी वर्ष बिहार से झारखण्ड के अलग होने के बाद वह प्रदेश सरकार में मंत्री बन गए।
वह वर्ष 2000-2005 के दौरान बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा की सरकार में मंत्री रहे।
उन्होंने पांच साल बाद तब भाजपा की सदस्यता छोड़ दी जब पार्टी ने उन्हें टिकट देने से इंकार कर दिया।
वर्ष 2005 में उन्होंने जगन्नाथपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। विडम्बना यह रही कि भाजपा को सरकार बनाने के लिए कोड़ा सहित चार अन्य निर्दलियों का समर्थन लेना पड़ा।
कोड़ा को खान और भूविज्ञान मंत्री बनाया गया लेकिन बहुत जल्द बड़े पैमाने पर उनके भ्रष्टाचार की कहानियां सामने आने लगीं।
आयकर विभाग के उज्जवल चौधरी ने कहा, "कोड़ा जब खान और भूविज्ञान मंत्री थे उस वक्त उनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के सौदों की जानकारी हमें मिली। इन सौदों में बेहिसाब धन का आदान-प्रदान किया गया था।"
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा से कई मुद्दों पर मतभेद के चलते कोड़ा ने तीन अन्य निर्दलियों के सहारे वर्ष 2006 में मुंडा सरकार को गिरा दिया।
इसके बाद कोड़ा कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के समर्थन से राज्य के मुख्यमंत्री बने। वर्ष 2006 से अगस्त 2008 तक उनका कार्यकाल उनके कुछ निर्णयों की वजह से खासा चर्चा में रहा।
मुंडा सरकार गिराने में कोड़ा के साथ आए तीन निर्दलियों में दो इन दिनों भ्रष्टाचार के मामलों में जेल में हैं। तीसरे कमलेश सिंह पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
कोड़ा ने वर्ष 2009 में सिंहभूम से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव जीता।
कोड़ा के खिलाफ भ्रष्टाचार के दो मामले दर्ज हैं। उन पर ज्ञात स्रोत से अधिक आय का भी आरोप है।
प्र्वतन निदेशालय ने उनके खिलाफ प्रिवेंशन आफ मनी लांडरिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। कोड़ा पर अपने किसी नजदीकी रिश्तेदार के नाम से लाइबेरिया में 8.5 करोड़ रुपये में खान खरीदने का आरोप है।
उल्लेखनीय है कि शनिवार को आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय ने देश के आठ शहरों में उनके 70 ठिकानों पर छापे मारे। इस मामले में कोड़ा से भी पूछताछ की गई।
झारखण्ड के सतर्कता विभाग ने कोड़ा के सहयोगी विनोद सिंह और संजय चौधरी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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