रेलवे के लक्जरी कोच में भारतीयों के लिए जगह क्यों नहीं?
नई दिल्ली, 1 नवंबर (आईएएनएस)। रेलवे विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए अपनी सभी प्रमुख रेलगाड़ियों में लक्जरी कोच लगाने की योजना पर विचार कर रहा है लेकिन बहुत से घरेलू यात्रियों का कहना है राष्ट्रीयता के बजाए भुगतान करने की क्षमता के आधार पर रेलगाड़ी में यात्रा की सुविधा दी जानी चाहिए।
रेलवे मंत्रालय के अधिकारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि सार्वजनिक सुविधाएं समिति (पीएसी) ने पिछले हफ्ते सिपारिश की थी कि विदेशी पर्यटकों की सुविधा के लिए रेलगाड़ियों में खास तरह के लक्जरी कोच जोड़े जाने चाहिए।
अधिकारी ने कहा,"समिति की सिफारिशें अंतिम नहीं है। प्रस्ताव का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद रेलवे बोर्ड और मंत्री प्रस्ताव का परीक्षण करने के बाद निर्णय लेंगे।"
बहुत से भारतीय विदेशी यात्रियों को वरीयता देने के रेलवे के रूख से आश्चर्यचकित हैं।
दिल्ली के व्यापार मामलों के सलाहकार वेंकटरमन श्रीनिवासन ने कहा,"क्या दुनिया के किसी भी देश के रेल नेटवर्क में विदेशी नगारिकों के लिए विशेष कोच है। रेलवे विदेशी नागरिकों के लिए लक्जरी कोच लगा कर अपनी कमाई बढ़ा सकता है लेकिन यह भेदभाव पूर्ण है। रेलवे कोई निजी उपक्रम नहीं है यह आम जनता के लिए है।"
लखनऊ के एक छात्र निखिलेश तिवारी का कहना है,"सरकार को इस पर फैसला राष्ट्रीयता के बजाए भुगतान करने की क्षमता के आधार पर लेना चाहिए। सरकार सिर्फ बहाना बना रही है।"
विदेशी यात्रियों को आकर्षित करने के लिए चुनिंदा कोचों को अधिक जगह वाला, लक्जरी सीटों, टॉयलेट, सोने के लिए लंबी और आरामदायक सीटों से युक्त बनाया जाएगा। कोच की खिड़कियां भी बड़ी होंगी जिससे यात्री प्राकृतिक दृश्यों का अवलोकन कर सके।
हालांकि लक्जरी कोचों के विचार के समर्थक लोग भी इसे सिर्फ विदेशी लोगों के लिए सीमित रखने के रेलवे के इरादे से सहमत नहीं हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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