पंजाब विश्वविद्यालय ने सूचना के लिए मांगे 12 लाख रुपये
विश्वविद्यालय का कहना है कि सूचना 600,000 पृष्ठों में समाहित है। छात्र वरुण मलिक ने विगत 10 अगस्त को आरटीआई अधिनियम के तहत 19 सवालों का जवाब मांगा था। मलिक विधि स्नातकोत्तर के छात्र हैं।
विश्वविद्यालय ने नौ सितम्बर को उन्हें सूचना मुहैया करवाई लेकिन मलिक इस उत्तर से संतुष्ट नहीं थे। वह अधिक विवरण चाहते थे। विश्वविद्यालय ने उनसे कहा कि वह 12 लाख रुपये जमा कराएं क्योंकि उत्तर 600,000 पृष्ठों का है।
मलिक ने आईएएनएस को बताया, "विश्वविद्यालय ने मुझे बताया कि हर पृष्ठ के लिए दो रुपये देने होंगे। मैं इससे सहमत हूं लेकिन मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता कि सूचना 600,000 पृष्ठों की हो सकती है।"
मलिक ने अपनी अर्जी में कई सवाल पूछे हैं। मसलन, छात्रावास में छात्रों से देर रात प्रवेश के शुल्क के रूप कितनी राशि एकत्र की गई और पिछले पांच वर्षो में इस राशि को कहां खर्च किया गया?
मलिक ने कहा, "हम विश्वविद्यालय के प्रशासन और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता चाहते हैं। मुझे विश्वास है कि अगर यह सूचना सार्वजनिक की जाती है तो गंभीर घपलों का पता चलेगा।"
उधर, विश्वविद्यालय के प्रवक्ता सुरिंदर शर्मा ने कहा, "हमने कोई अवैध रकम नहीं मांगी है। हम कानूनी प्रक्रिया के तहत काम कर रहे हैं। हम आरटीआई अधिनियम के तहत कोई भी सूचना देने के लिए तैयार हैं। हमारा आरटीआई विभाग बहुत जिम्मेदार है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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