कश्मीर के प्रीपेड मोबाइल उपभोक्ताओं का सवाल : क्या हम सभी आतंकी हैं?
जम्मू/श्रीनगर, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा कारणों से जम्मू एवं कश्मीर में मोबाइल के प्रीपेड कनेक्शन पर रविवार से लगाए जा रहे प्रतिबंध को लेकर पूरे राज्य में नाराजगी का माहौल व्याप्त हो गया है। नाराज होने वालों में ज्यादातर युवक हैं।
राज्य सरकार ने हालांकि इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से बात करने का वादा किया है, लेकिन राज्य की युवा पीढ़ी इस बात को लेकर नाराज है कि उसे उन आतंकियों के साथ जोड़ दिया गया है जो प्रीपेड कनेक्शन का दुरुपयोग करते हैं।
शाहिद खान नामक एक छात्र गुस्से और हताशा में पूछता है, "क्या हम सभी आतंकी हैं? क्या प्रीपेड कनेक्शन धारी लाखों उपभोक्ता आतंकी हैं?"
इस सेवा को बंद किए जाने के निर्णय से उपभोक्ताओं में पूरी तरह उथल-पुथल मची हुई है।
श्रीनगर में कॉलेज के एक छात्र मुजफ्फर अहमद (23) ने कहा, "यह आश्चर्यजनक है कि हमें इसलिए दंडित किया जा रहा है, क्योंकि कुछ लोग इस सुविधा का दुरुपयोग कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है और निंदनीय है।"
राज्य में लगभग 38 लाख प्रीपेड कनेक्शन हैं। इनमें से ज्यादातर एयरटेल (10 लाख) और टाटा इंडीकॉम, आइडिया, एयरसेल, रिलायंस जैसी कंपनियों के हैं। इन कंपनियों ने इस सेवा के लिए बड़ा निवेश किया है और सरकार के इस निर्णय से वे भी नाराज हैं।
मोबाइल सेवा प्रदाता एक प्रमुख कंपनी के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "यह एक बुरा कदम है।"
ज्यादातर लोग, खासतौर से युवक जिनके पास थोड़ी बहुत पॉकेट मनी होती है, वे प्रीपेड कनेक्शन को वरीयता देते हैं। वे सभी सरकार के इस कदम से नाराज हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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