'सिखों को खुश करने के लिए नहीं की थी इंदिरा की हत्या'
चंडीगढ़, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। पच्चीस बरस पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को निशाना बनाते हुए अपना रिवाल्वर खाली करने वाले बेअंत सिंह के पुत्र का कहना है कि उसके पिता ने सिख समुदाय को खुश करने के लिए ऐसा नहीं किया था, वरन वह व्यक्तिगत रूप से सेना के ऑपेरशन ब्लूस्टार का बदला लेना चाहता था।
बेअंत सिंह के 30 वर्षीय पुत्र सरबजीत सिंह खालसा ने आईएएनस को एक विशेष साक्षात्कार में कहा, "मेरे पिता ने न तो किसी संगठन के इशारे से और न ही सिख जत्थेबंदी को खुश करने के लिए इंदिरा गांधी की हत्या की। मेरे पिता ने उग्र कदम अपनी भावनाओं के प्रवाह में बहकर उठाया था और हालात को देखते हुए हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं।"
सरबजीत सिंह केवल पांच वर्ष का था जब उसके पिता और सतवंत सिंह ने 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या कर दी।
सरबजीत ने कहा पापाजी और सतवंत सिंह ऑपरेशन ब्लूस्टार के बाद स्वर्ण मंदिर गए थे। वहां सिखों के पवित्र स्थल की दुर्दशा देखकर उन्होंने इंदिरा गांधी की हत्या का फैसला किया था।
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद बेअंत सिंह ने हथियार डाल दिए और अन्य सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। लेकिन कुछ ही मिनटों में भागने का प्रयास करने पर सुरक्षाकर्मियों ने उसको मौत के घाट उतार दिया। सतवंत सिंह को वर्ष 1989 में फांसी दे दी गई।
बेअंत चंडीगढ़ के मलोया गांव का और सतवंत अमृतसर के समीप के डेरा बाबा नानक क्षेत्र के अगवान गांव का निवासी था।
घटना के बाद कट्टरपंथी सिख संगठनों ने उन दोनों के परिवारों का सम्मान किया। बेअंत सिंह की विधवा पत्नी बिमल कौर खालसा तो रोपड़ संसदीय क्षेत्र से लोकसभा के लिए निर्वाचित भी हुई। कुछ वर्ष बाद उसकी मृत्यु हो गई।
लोकसभा के लिए निर्वाचित होने का असफल प्रयास करने वाला सरबजीत इस समय रियल स्टेट के व्यापार में लगा हुआ है। वह अपनी पत्नी और बेटे के साथ चंडीगढ़ से सटे मोहाली में रहता है और वहीं से अपने व्यापार का संचालन करता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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