इंदिरा के अंतिम क्षणों की याद ताजा करने उमड़े देशवासी
एक सफदरजंग के बाहर देश के कोने-कोने से आए लोगों में कोलकाता की अमिया दास भी थीं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बच्चों प्रियंका तथा राहुल के श्रद्धांजलि देने पहुंचने से सुरक्षा कारणों से कतार में खड़े अन्य लोगों के साथ उन्हें भी उस समय प्रवेश करने से रोक दिया गया था।
इससे निराश दास ने टूटी-फूटी हिंदी में कहा, "मैं कोलकाता से उस स्थान को देखने आई थी जहां इंदिरा गांधी ने अंतिम विदा ली।"
संग्रहालय में प्रवेश का इंतजार कर रही कर्नाटक की राजश्री राजू ने आईएएनएस को बताया, "मैं पहली बार दिल्ली आई हूं और जिन स्थानों पर जाना चाहती हूं उनमें इंदिरा गांधी का स्मारक भी शामिल है, जहां वर्ष 1984 में उनकी हत्या हुई थी। मैं तब केवल 15 वर्ष की थी और पूरी तरह टूट गई थी। वह एक करिश्माई नेता थीं।"
उन्होंने कहा, "आज मैं अपनी पुत्री के साथ इंदिरा जी से संबंधित वस्तुओं देखकर उनकी यादों को ताजा करने संग्रहालय पहुंची हूं। मैं हमेशा अपनी बेटी से कहती हूं कि लड़कियों को इंदिरा जी जैसा होना चाहिए।"
संग्रहालय के एक केयरटेकर के अनुसार किसी भी दिन करीब 5,000 लोग संग्रहालय आते हैं।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका सहित कई वरिष्ठ नेताओं के श्रद्धांजलि देने के बाद संग्रहालय के दरवाजे जब खोले गए तो वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई।
अपनी मां और भाई के वापस लौटने के बाद भी प्रियंका गांधी लंबे समय तक संग्रहालय में रुकी रहीं।
संग्रहालय के एक अधिकारी ने बताया, "उन्होंने पुष्प अर्पित किए और अपनी दादी के संग्रहालय में शांति से बैठी रहीं।"
राजीव भाटिया (60 वर्ष) ने कहा कि वह कई बार इस स्थान पर आ चुके हैं और हर बार खून के दाग अच्छी तरह से देख पाते हैं। उन्होंने कहा कि आज भारत को इंदिरा गांधी जैसे नेताओं की जरूरत है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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