एक लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य पूरा करने को छोड़ी नौकरी

लखनऊ, 31 अक्टूबर(आईएएनएस)। आमतौर पर लोगों का लक्ष्य अच्छी नौकरी पाकर अच्छी जीवन शैली जीना होता है, लेकिन चंद्र भूषण तिवारी की जिंदगी का लक्ष्य एक लाख पेड़-पौधे लगाना है और इसे पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी तक छोड़ दी।

लखनऊ के शारदा नगर इलाके में रहने वाले तिवारी अब तक राजधानी के अलग-अलग इलाकों में करीब 40,000 हजार पेड़-पौधे लगा चुके हैं।

आंखों में शिक्षक बनने का सपना पालने वाले तिवारी को 1993 में उड़ीसा के संबलपुर में केंद्रीय विद्यालय में शिक्षक की नौकरी मिल गई थी, लेकिन एक साल बाद वह नौकरी छोड़ वापस लखनऊ आ गए और तन मन से अपने लक्ष्य को पूरा करने में जुट गए।

तिवारी ने आईएएनएस से कहा कि अगर इसी तरह से शहरीकरण के लिए हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जाती रही और नए पौधे नहीं लगाए गए तो हमें भविष्य में सांस लेने के लिए शुद्ध ऑक्सीजन नहीं मिलेगी।

'बावला' के नाम से मशहूर तिवारी साइकिल से और पैदल घूम-घूमकर पौधे लगाते हैं और लोगों को पेड़ों का महत्व समझ्झाते हैं। वह लोगों से कहते हैं कि वे कम से कम एक पेड़ लगाएं। कई सालों तक तिवारी ने खुद के पैसों से खरीदकर पेड़-पौधे लगाए लेकिन अब लोग उनकी इस मुहिम में उनका साथ दे रहे हैं।

आशियाना इलाके के राकेश दत्त ने कहा कि हम तिवारी के हौंसले का सम्मान करते हैं। आज के युग में इतने निस्वार्थ भाव से कोई जनकल्याण का काम नहीं करता। पर्यावरण को हरा-भरा बनाने की इस मुहिम में हम इनकी मदद करते हैं।

तिवारी के मुताबिक आज कोई उन्हें पेड़ खरीदने के लिए चंदा देता है तो कोई उन्हें पेड़-पौधे खरीदकर देता है। हालांकि सरकार की तरफ से अभी उन्हें किसी भी तरह सहायता नहीं मिलती है।

तिवारी ने अपनी मुहिम की शुरुआत वर्ष 1992 में राजधानी के तेलीबाग के आस-पास के इलाकों में बरगद, पीपल, नीम जैसे छायादार पेड़ों के साथ-साथ केले, अमरूद, आम और जामुन जैसे फलदार पेड़ लगाने से की थी।

इस लक्ष्य की प्रेरणा कहां से मिली पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की शुरूआत दो भूखे भिखारियों को खाने के लिए लड़ते देखने से हुई थी। वह कहते हैं कि एक मंदिर के बाहर प्रसाद के रूप में मिले केले के लिए दो भिखारियों को लड़ते देख मेरे दिमाग में ख्याल आया कि अगर धरती पर चारों तरफ हर जगह फलदार पेड़ हों तो कोई भूखा नहीं रहेगा।

तिवारी गरीब बच्चों के लिए अशियाना और बंग्लाबाजार इलाकों में दो स्कूल चलाते हैं। प्रवेश के समय इन स्कूलों में वह हर बच्चे से एक पेड़ लगाने का संकल्प लेते हैं।

देविरया जिले के भटवा गांव में 20 बीघे की पैतृक जमीन पर होने वाली खेती से जो आमदनी होती है उसे तिवारी पेड़-पौधे लगाने में खर्च कर देते हैं। घर परिवार का खर्च उनकी पत्नी सुशीला तिवारी चलाती हैं, जो लखनऊ के एक इंटर कॉलेज में शिक्षिका हैं।

तिवारी कहते हैं कि आज लोगों को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करने की बहुत जरूरत है। उनका मानना है कि यदि हर व्यक्ति एक फलदार पेड़ लगाए तो इस धरती से भुखमरी खत्म हो जाएगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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