मनमोहन ने 2020 के भारत की रूपरेखा पेश की (राउंडअप)
प्रधानमंत्री ने परोक्ष रूप से यह स्वीकार भी किया कि नक्सली हिंसा के खिलाफ लड़ाई को लेकर केंद्र सरकार और उसके घटक दलों में मतभेद है। उनके मुताबिक देश के विकास का सारा बोझ सिर्फ केंद्र सरकार पर ही नहीं होना चाहिए बल्कि राज्यों की भी इसमें सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने अपने सभी पड़ोसियों और पूरे विश्व के साथ शांति से रहने की भी बात कही।
प्रधानमंत्री ने 'हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट' में देश दुनिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर शुक्रवार को अपनी राय व्यक्त की। एक सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा, "हम एक लोकतांत्रिक देश हैं। ऐसे मौके भी आते हैं जब हमारे गठबंधन में शामिल नेताओं के विचारों में मतभेद होते हैं। कानून और व्यवस्था किसी भी जिम्मेदार सरकार की पहली जिम्मेदारी होती है। इसकी राह में यदि कोई भी बाधा आती है तो उसका वैसे ही मुकाबला किया जाएगा जैसा कि किया जाना चाहिए।"
प्रधानमंत्री से दरअसल यह सवाल पूछा गया था कि क्या नक्सलियों को रेल मंत्री ममता बनर्जी के समर्थन ने नक्सलवाद की गंभीर समस्या के खिलाफ लड़ाई में सरकार के रुख को मुश्किल में डाल दिया है।
उल्लेखनीय है कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने गुरुवार को प्रधानमंत्री से तृणमूल कांग्रेस और नक्सलियों के संबंधों की जांच की मांग की थी। ममता तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष हैं।
देश के विकास में राज्यों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते उन्होंने कहा, "देश का भविष्य सिर्फ केंद्र सरकार नहीं बना सकती है। इसके लिए हमें राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी चाहिए। वह भी केवल विकास प्रक्रिया में नहीं बल्कि कानून व व्यवस्था लागू करने के मामले में भी।"
प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा कि नदियों के जोड़ने की परियोजना में सावधानी बरतने की भी बात कही। उन्होंने कहा, "नदियों को जोड़ने से सिंचाई के क्षेत्रों में वृद्धि होगी लेकिन हमें इसके चलते होने वाले पर्यावरणीय नुकसानों को लेकर भी सावधानी बरतनी होगी। इस संबंध में पर्यावरण को लेकर बहुत चिंता जताई गई है। विशेषज्ञों ने भी इस पर अलग-अलग राय व्यक्त किए हैं।"
उन्होंने कहा, "दो या तीन परियोजनाओं का हम प्रयोग के तौर पर जल्द ही शुभारंभ करने वाले हैं।"
इतिहास के बोझ से उबरने और आगे बढ़ने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सभी पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध चाहता है। उन्होंने कहा, "हम पूरी ईमानदारी के साथ अपने पड़ोसियों के साथ सभी लंबित मसले बातचीत के जरिये सुलझाना चाहते हैं। ..जो हमारे संबंधों को परिभाषित करे।"
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "पाकिस्तान बहुत सी आतंरिक समस्याओं से जूझ रहा है। आतंकवाद में वृद्धि उनमें से एक है। मैं इसके खिलाफ संघर्ष में पाकिस्तान की सफलता की कामना करता हूं।" प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ज्यादा विस्तार में न जाते हुए कल की तरह सिर्फ इतना ही कहेंगे कि यह दक्षिण एशिया के सभी देशों की किस्मत से जुड़ा मुद्दा है।
मनमोहन सिंह ने स्वास्थ्य और शिक्षा के लाभ ग्रामीण इलाकों तक पहुंचने की भी बात कही। उन्होंने कहा, "हम ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूती प्रदान करना चाहते हैं।"
ग्रामीण इलाकों को शिक्षा और स्वास्थ्य का लाभ दिलाए जाने पर जोर देते हुए उन्होंने आशा जताई कि स्वास्थ्य बीमा गरीबों सहित सभी व्यक्तियों को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का कारगर माध्यम बन गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जरूरत है। सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी एन. के. सिंह के प्रश्न के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार प्रक्रिया के कई आयाम हैं। उन्होंने कहा, "हमें सुधार प्रक्रिया में तेजी लानी होगी।"
प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे और शिक्षा पर जोर देना ही होगा।
उन्होंने कहा, "हमें उद्यमों के विकास के अनुकूल वातावरण तैयार करना होगा। हमें ग्रामीण विकास में सरकार की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।" उन्होंने कहा कि यह दोनों तरह की सुधार प्रतिबद्धताओं का मिश्रण है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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