जेटली भी नहीं सुलझा पाए कर्नाटक में भाजपा सरकार का संकट
विद्रोही तेवर अपनाए पर्यटन मंत्री जी. जनार्दन रेड्डी, राजस्व मंत्री जी. करूणाकर रेड्डी और स्वास्थ्य मंत्री बी. श्रीरामुलु नेतृत्व परिवर्तन की मांग पर अड़े हुए हैं जबकि जेटली ने स्पष्ट कर दिया है कि नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा।
उल्लेखनीय है कि सरकार का संकट गहराते देख पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने जेटली को संकटमोचक की भूमिका में बेंगलुरू भेजा था। उन्होंने पिछले दो दिनों में बीचबचाव की कोशिशें की लेकिन कोई नतीजा अभी तक नहीं निकल पाया है। जेटली बेंगलुरू से सीधे मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं।
उधर बेल्लारी में जनार्दन रेड्डी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "घर का मुखिया गलत दिशा में जा रहा है। भाजपा को यदि सत्ता में रहना है तो उसे कर्नाटक में नया मुखिया चाहिए।"
उन्होंने कहा, "हमने केंद्रीय नेताओं से साफ कह दिया है कि मुखिया बदलना चाहिए। हमें विश्वास है कि ऐसा ही होगा।"
उधर, मुख्यमंत्री विद्रोही मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने गुरुवार को कहा था, "उनकी मांगों के आगे मैं झुकने वाला नहीं हूं। उन्होंने बेल्लारी जिले में एक कार्यक्रम के दौरान मेरी आलोचना की, जहां उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए एक आवास योजना की शुरुआत की। मैं इन सब चीजों से घबराने वाला नहीं हूं।"
इस संकट की शुरुआत रेड्डी भाइयों द्वारा अपने गृह जिले बेल्लारी में बाढ़ पीड़ितों के लिए 50,000 घरों का निर्माण कार्य पिछले दिनों आरंभ करने से हुई। इसके लिए उन्होंने खुद पैसे लगाए और अन्य खदान मालिकों से चंदा लिया।
येदियुरप्पा चाहते थे कि बाढ़ राहत व पुनर्वास कार्य निजी तौर पर न करके सरकार के सामूहिक प्रयास से किया जाए लेकिन रेड्डी भाइयों ने उनकी नहीं सुनी और आवास योजना के लिए भूमि पूजन भी कर दिया। इस भूमि पूजन के कार्यक्रम में येदियुरप्पा को भी आमंत्रित नहीं किया।
भूमि पूजन के दिन ही येदियुरप्पा ने रेड्डी भाइयों के करीबी पांच वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया। येदियुरप्पा ने इनके तबादले के पीछे यह तर्क दिया कि राहत व पुनर्वास कार्यो का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से सुनिश्चित हो सके, इसके लिए उनके तबादले किए गए। रेड्डी भाइयों ने मुख्यमंत्री के इस कदम को दलित विरोधी बताया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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