सुनियोजित नहीं था ऑपरेशन ब्लूस्टार : अलेक्जेंडर (31 अक्टूबर पर विशेष)

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के प्रमुख सचिव रहे पी. सी. अलेक्जेंडर के मुताबिक इंदिरा गांधी ने अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में सेना भेजने का फैसला अंतिम उपाय के रूप में किया था, वह भी तत्कालीन थल सेना प्रमुख ए. एस. वैद्य के इस आश्वासन पर कि स्वर्ण मंदिर की एक ईंट तक को नुकसान नहीं पहुंचेगा।

अलेक्जेंडर ने चेन्नई से आईएएनएस को फोन पर दिए एक साक्षात्कार में कहा, "उस समय जो भी हुआ वह सुनियोजित नहीं था। इंदिरा ने जितनी कार्रवाई को मंजूरी दी थी और सेना प्रमुख को जितनी कार्रवाई का संकेत दिया था, उसके विपरीत स्वर्ण मंदिर में कार्रवाई हुई।"

इंदिरा गांधी की हत्या को 25 साल हो गए हैं। उनके ही दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने स्वर्ण मंदिर में हुई कार्रवाई से क्षुब्ध में उनकी हत्या कर दी थी।

अलेक्जेंडर कहते हैं कि इंदिरा गांधी ने इस मामले का राजनीतिक समाधान निकालने का भरपूर प्रयास किया। वह कहते हैं, "1980 में जब वह सत्ता में आई तो पंजाब की समस्या के समाधान के लिए उन्होंने हरचंद सिंह लोंगोवाल, प्रकाश सिंह बादल और सुरजीत सिंह बरनाला से कई दौर की बातचीत की। लेकिन पंजाब की समस्या विकराल रूप लेती गई। भिंडरांवाला सिखों और हिन्दुओं के बीच दूरियां पैदा कर रहा था। वह लड़ाके तैयार कर रहा था और हिन्दुओं के खिलाफ जहर घोल रहा था। उसे ब्रिटेन और कनाडा से पैसे मिल रहे थे।"

उन्होंने कहा, "उसने जब अकाल तख्त और हरमिंदर साहिब पर कब्जा कर लिया तब इंदिरा गांधी को लगा कि अब भी उनकी मांगें पूरी कर दी गईं तो भी वे अब अलग राज्य की मांग पर जोर देंगे।"

वह कहते हैं, "इंदिरा गांधी ने पंजाब की स्थिति पर चर्चा के लिए एक बैठक बुलाई। थल सेना प्रमुख ए. एस. वैद्य, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के अध्यक्ष आर. एन. काव, रक्षा राज्यमंत्री के. पी. सिंह देव और खुद मैं उस बैठक में उपस्थित था।"

उन्होंने कहा, "जनरल वैद्य ने उन्हें आश्वस्त किया कि स्वर्ण मंदिर परिसर के अंदर सेना का उपयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया था कि किसी भी सूरत में गुरुग्रंथ साहिब को और मंदिर की एक ईंट को भी नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। वैद्य ने इंदिरा को बार-बार आश्वासन दिया कि वह जैसा चाहती हैं वैसा ही होगा।"

इन्हीं शर्तो पर उन्होंने सेना को आगे की कार्रवाई के आदेश दिए।

उन्होंने कहा, "चार दिनों के बाद वैद्य ने फिर से इंदिरा से मुलाकात की और कहा कि तय कार्यक्रम के हिसाब से कार्रवाई संभव नहीं हो पा रही है क्योंकि भिंडरांवाला और उसके साथ हथियार व शस्त्रों से लैस थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन जोखिम भरा है लेकिन फिर भी हम हरसंभव कोशिश करेंगे कि मंदिर परिसर को नुकसान न पहुंचे।"

एलेक्जेंडर बताते हैं कि गांधी ने उनकी बातों को गौर से सुना और अंतत: जनरल की बातों से सहमत हो गईं। गांधी ने उस समय कहा था कि मुझे अपने जनरल पर भरोसा है।

वह कहते हैं, "बहरहाल, ऑपरेशन जैसा सुनियोजित होना था, वैसा नहीं हो सका। टैंकों का इस्तेमाल आवश्यक हो गया था।"

उन्होंने कहा, "स्वर्ण मंदिर में जो कुछ भी हुआ उससे इंदिरा गांधी नाराज थीं। यद्यपि उन्हें सेना के ऑपरेशन में कोई गलती नहीं दिखी। उन्होंने कभी नहीं कहा कि सेना ने उन्हें शर्मिदा किया। उन्हें भारतीय सेना और सिखों की धरोहर पर गर्व था। लेकिन सिख सुरक्षाकर्मियों ने ही उनकी हत्या कर दी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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