डिपो में आग : आग से 500 करोड़ रुपये का नुकसान (लीड-4)
पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा ने हादसे की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा की है। जांच समिति की अध्यक्षता हिंदुस्तान पेट्रोलियम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेश लाल करेंगे। समिति छह सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट पेट्रोलियम मंत्रालय को सौंपेगी।
देवड़ा ने कहा कि इंडियन ऑयल के डिपो में लगी आग में पूरे ईंधन को जलने देने के अलावा फिलहाल कोई अन्य विकल्प नहीं है। आग पर पूरी तरह काबू पाने में एक-दो दिन लग जाएंगे।
देवड़ा ने कहा कि इंडियन ऑयल डिपो के छह कर्मचारी अभी तक डिपो के अंदर फंसे हुए हैं और उनके जीवित बचने की संभावना बहुत कम है।
देवड़ा ने मारे गए लोगों के परिजनों के लिए 10 लाख रुपये और घायलों के लिए दो लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है। बकौल देवड़ा मामूली रूप से घायल लोगों को एक लाख रुपये दिए जाएंगे। मुआवजे की यह रकम राज्य सरकार द्वारा घोषित मुआवजे के अतिरिक्त है।
इससे पहले राजस्थान सरकार ने आग में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए दो लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों के लिए एक लाख रुपये और अन्य घायलों को पचास हजार रुपये का मुआजा देने का ऐलान किया था।
मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार अब तीन लोगों की मौत हुई है जबकि इंडियन ऑयल के छह कर्मचारी लापता हैं। 40 लोग घायल हुए हैं जिनका सवाई मानसिंह अस्पताल में इलाज किया जा रहा है।
देवड़ा घायलों को देखने के लिए सवाई मानसिंह अस्पताल का दौरा भी किया। उन्होंने कहा कि स्थिति पर काबू पाने में अभी एक या दो दिन का समय लग सकता है।
एक अनुमान के मुताबिक आग से 500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। डिपो में आग लगने की खबर से शुक्रवार को बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में इस कंपनी के शेयरों में 7.5 फीसदी गिरावट दर्ज की गई।
गुरुवार को बंद हुए बाजार में इंडियन ऑयल के प्रति शेयर की कीमत 315.25 रुपये थी लेकिन शुक्रवार को बाजार खुलते ही यह लुढ़क कर 291.50 रुपये रह गई। परंतु बाद में यह बढ़कर 314.10 रुपये पर बंद हुई।
उल्लेखनीय है कि डिपो में 7,000 किलोलीटर पेट्रोल, 24,000 किलोलीटर डीजल और 1,000 किलोलीटर किरोसीन था। आग को बुझाने के लिए मथुरा से दो ट्रक फोम मंगाई गई है।
जिला अधिकारी ने घटनास्थल के आसपास के पांच किलोमीटर के दायरे में किसी के भी आने-जाने पर रोक लगा दी है। जयपुर-कोटा राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई है और निकट के रेलमार्ग से गुजरने वाली 20 रेलगाड़ियों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं। आसपास के गांव भी खाली करा लिए गए हैं।
आग लगने की वजह का पता लगाया जा रहा है लेकिन कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि एक टैंक से गैस लीक होने के बाद आग लगी। आग की लपटें 15 किलोमीटर की दूरी से देखी जा सकती हैं।
कंपनी के पास 11 विशाल टैंक हैं और सभी जलते दिखाई दे रहे थे। डिपो के निकट की एक फैक्टरी भी जल गई। आग बुझाने के काम में अग्निशमन दस्ते की 25 गड़ियों को लगाया गया।
आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों ने आग लगने से पहले बड़े धमाकों की आवाज सुनी। बहुत से लोग सांस लेने में कठिनाई होने और आंखों में जलन की शिकायत कर रहे हैं। चिकित्सकों ने लोगों को घटनास्थल के निकट न जाने की सलाह दी है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि सभी निजी अस्पतालों को घायलों का इलाज करने को कहा गया है। उनके इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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