मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग से एक तिहाई भी संतुष्ट नहीं
उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और सिक्किम को छोड़कर अन्य राज्यों में 2008 में सूचना के अधिकार की स्थिति का अध्ययन कराया गया। इस अध्ययन के चार बिंदु तय किए गए थे जो राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े थे।
राष्ट्रीय जन सूचना पुरस्कार एवं 'जानो रे' अभियान के प्रशांत दूबे और रोली शिवहरे ने शुक्रवार को राष्ट्रीय सूचना अधिकार पुरस्कार सचिवालय द्वारा कराए गए एक अध्ययन का ब्यौरा जारी किया। उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि प्रदेश में सूचना के अधिकार कानून बने चार साल हो गए हैं उसके बाद भी आवेदनकर्ता को सूचना समय पर नहीं मिल पा रही है।
उन्होंने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ 31 प्रतिशत लोग ही राज्य सूचना आयोग से संतुष्ट हैं। इस मामले में मध्य प्रदेश देश में छठवें स्थान पर है। वहीं प्रभावशीलता में राज्य को सातवां स्थान हासिल हुआ है और आयोग की ओर से दी गई सूचना के मामले में मध्य प्रदेश को सातवां स्थान मिला है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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