बागीचों के शहर बेंगलुरू में काटे गए 50,000 पेड़
बेंगलुरू, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। बागीचों के शहर के नाम से मशहूर बेंगलुरू जल्द ही कंकरीट शहर में तब्दील हो सकता है। आधारभूत सुविधाओं के विकास के नाम पर हाल के वर्षो में यहां लगभग 50,000 पेड़ों की कटाई हो चुकी है जबकि मेट्रो रेल परियोजना के लिए करीब 300 पेड़ों की कटाई अभी बाकी है।
पर्यावरणविदों और शहरवासियों को डर है कि अंधाधुंध हो रही पेड़ों की कटाई से यह शहर अपनी 'हरित धरोहर' की उपाधि न खो दे। पेड़ों की कटाई के प्रति लोगों का डर निर्मूल नहीं है, पूरे बेंगलुरू की सड़कों के किनारे रखीं कटे हुए पेड़ों की टहनियां और लट्ठे लोगों के डर को व्यक्त कर रहे हैं।
पिछले दो दशकों से बेंगलुरू में रह रहे प्रवीण मेहता ने आईएएनएस से कहा, "विकास के नाम पर पेड़ों को कटता हुआ देखना बेहद दु:खद है। बेंगलुरू के हरे-भरे होने की वजह से मुझे इस शहर से प्यार हो गया था लेकिन हाल के वर्षो में यहां पेड़ तेजी से गायब हो रहे हैं।"
बेंगलुरू के केंद्र में विधानसभा भवन 'विधान सौध' और 'सेंट्रल कॉलेज' सड़क के नजदीक से शुरू होने वाली मेट्रो रेल लाइन 'नाम्मा मेट्रो' के लिए 279 पेड़ों को जल्दी ही गिरा दिया जाएगा।
बेंगलुरू के एक एनजीओ 'एनवायरॉनमेंट स्पोर्ट ग्रुप' (ईएसजी) और सामुदायिक संगठनों के समूह 'हासीरू युसीरू' (हरियाली है जीवन) की रिपोर्ट के मुताबिक केवल पिछले दो-तीन वर्षो में विकासात्मक कार्यो की वजह से यहां के करीब 50,000 पेड़ों को गिरा दिया गया है।
'हासीरू युसीरू' के संयोजक विनय श्रीनिवास कहते हैं, "विधान सौध और सेंट्रल कॉलेज इलाके में लगे ज्यादातर पेड़ 150 वर्ष पुराने हैं। वे हमारी धरोहर हैं। जिन पेड़ों को बढ़ने में सालों लगते हैं विकास के नाम पर उन्हें काट देना तार्किक नहीं है।"
यह समूह 'बेंगलुरू मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड' (बीएमआरसीएल) के समक्ष एक ज्ञापन सौंपने की योजना बना रहा है। इस ज्ञापन में कार्पोरेशन से उन स्थानों पर परियोजना मुल्तवी करने के लिए कहा जाएगा जहां इसके लिए कई पेड़ों को काटना पड़ेगा।
श्रीनिवास कहते हैं, "यदि हमारे ज्ञापन पर गौर नहीं किया गया तो हम विरोध शुरू कर देंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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