गैस की ऊंची कीमत से केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज को फायदा : सर्वोच्च न्यायालय
प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन, न्यायाधीश आर.वी.रविंद्रन और न्यायाधीश पी.सथशिवम की खंडपीठ ने कृष्णा-गोदावरी गैस विवाद पर छठे दिन सुनवाई करते हुए टिप्पणी की, " यदि कीमतें कम होंगी, देश को लाभ होगा। यदि यह अधिक होंगी तो केवल आपको फायदा होगा।"
मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह के वकील हरीश साल्वे द्वारा पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ कंपनी के सौदे और विभिन्न औद्योगिक कंपनियों के बीच हाइड्रोकार्बन के उपयोग की सरकारी नीतियों की बारीकियां न्यायालय के सामने पेश करने के दौरान पीठ ने यह टिप्पणी की।
न्यायालय ने यह भी पूछा कि क्या कृष्णा-गोदावरी की गैस को अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज और सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी के लिए आरक्षित रखा जा सकता है, जो रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ कानूनी लड़ाई में उलझे हुए हैं।
इसके जवाब में साल्वे ने कहा कि तकनीकी रूप से यह संभव नहीं है और रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज को 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर से गैस बेचना आर्थिक रूप से भी व्यावहारिक नहीं है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एनटीपीसी से जारी एक निविदा में भी इसी दर का प्रस्ताव दिया था।
साल्वे ने अनिल और मुकेश अंबानी का हवाला देते हुए कहा कि यदि दोनों भाइयों में कोई विवाद नहीं होता और दोनों एक साथ होते तो भी रिलायंस इंडस्ट्रीज का इस कीमत पर गैस आपूर्ति करना संभव नहीं होता।
पारिवारिक समझौते के अनुसार अनिल अंबानी समूह 17 वर्षो तक 2.34 डॉलर प्रति यूनिट की दर से प्रतिदिन 2.8 करोड़ यूनिट गैस की आपूर्ति चाहता है। परंतु मुकेश अंबानी समूह का कहना है कि वह केवल सरकार द्वारा तय 4.20 डॉलर प्रति यूनिट की दर से गैस आपूर्ति कर सकता है।
साल्वे ने न्यायालय को बताया कि अनिल समूह की अभी तक शुरू नहीं हुई दादरी ऊर्जा परियोजना को 17 वर्षो तक आपूर्ति के लिए कृष्णा-गोदावरी बेसिन की गैस पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार के साथ गैस आपूर्ति के समझौते और गैस उपयोग की नीति के अनुसार ऊर्जा और उर्वरक उत्पादन के अतिरिक्त किसी अन्य उद्देश्य के लिए गैस की आपूर्ति संभव नहीं है।
साल्वे ने कहा कि यदि अनिल का समूह दादरी परियोजना को आरंभ करता है तो भी उसके पूरा होने और गैस आपूर्ति बहाल होने में कम से कम तीन वर्ष लगेंगे।
यदि दादरी संयंत्र वर्ष 2013 में शुरू होता है तो कृष्णा गोदावरी से गैस आपूर्ति केवल छह साल या वर्ष 2019 तक ही हो सकती है क्योंकि इस समय तक गैस भंडार के समाप्त होने का अनुमान है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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