गन्ने की कीमतों पर सरकारी नियंत्रण का खात्मा चाहते हैं किसान
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी.एम. सिंह ने आईएएएनएस से कहा ," किसानों को अपनी फसल का मूल्य तय करने का अधिकार मिलना चाहिए।"
सिंह के अनुसार राज्य में गन्ना उत्पादक क्षेत्र के केंद्र में होने के कारण बरेली को विरोध सभा के आयोजन स्थल के रूप में चुना गया।
महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व वाली भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू), किसान मित्र संघर्ष समिति, किसान सभा और किसान संगठन सहित राज्य के गन्ना किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी संगठनों ने विरोध सभा में हिस्सा लिया।
वी.एम.सिंह ने कहा कि किसानों को राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा निर्धारित कीमतों पर गन्ना बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
उन्होंने कहा," हमें गन्ने का क्रय मूल्य तय करने की मौजूदा प्रक्रिया को खत्म करना होगा। सरकार को कानून में उपयुक्त बदलाव करना चाहिए। गन्ने का मूल्य तय करने की मौजूदा प्रक्रिया केवल चीनी मिल मालिकों को लाभ पहुंचाने वाली है।"
हाल में राज्य सरकार द्वारा गन्ने के क्रय मूल्य में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किए जाने के बारे में पूछ जाने पर सिंह ने इसे 'अपर्याप्त' बताया।
उन्होंने कहा कि बाजार में चीनी की कीमत 35 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है।
वी.एम. सिंह ने कहा," अगर सरकार हमारी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो गन्ने की खेती करने वाले किसान ऐसी फसल की खेती करने को बाध्य होंगे जिस पर सरकारी नियंत्रण न हो।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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