जरदारी के सामने दो रास्ते : सत्ता छोड़नी होगी या फिर अधिकार !
पाकिस्तानी समाचार पत्र 'द न्यूज' ने कई राजनीतिज्ञों, वरिष्ठ अधिकारियों और जरदारी के एक सहयोगी के हवाले से इस संबंध में खबर प्रकाशित की है। समाचार पत्र का कहना है कि जरदारी के लिए अगले एक-दो महीने काफी कठिन साबित होने वाले हैं।
समाचार पत्र ने कहा कि जरदारी के पास एक विकल्प अपनी कार्यकारी शक्तियों को छोड़कर राष्ट्रपति बने रहने का भी है, जैसा कि पहले रफीक तरार और फजल इलाही चौधरी कर चुके हैं। ऐसी स्थिति में जरदारी राष्ट्रीय सुलह अध्यादेश (एनआरओ) को नेशनल असेंबली में पारित करवाना चाहेंगे।
वैसे एनआरओ को नेशनल असेंबली में पारित करवाने के लिए जरदारी के पास बहुमत नहीं हैं। जरदारी के एक प्रमुख सहयोगी के हवाले से समाचार पत्र ने कहा, "राष्ट्रपति मौजूदा स्थिति से पूरी तरह वाकिफ हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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