रेत की कलाकृति बनाकर किया चक्रवात पीड़ितों का सम्मान
पटनायक ने 'गोल्डन सैंड आर्ट इंस्टीट्यूट' के अपने छात्रों के साथ मिलकर पांच फुट ऊंची रेत की एक मूर्ति बनाई है।
29 अक्टूबर 1999 को आए चक्रवाती तूफान में 36 घंटे तक 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चली थीं। 14 तटीय जिले इस तूफान की चपेट में आ गए थे। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक चक्रवात में आठ हजार लोगों की मौत हो गई थी और तीन लाख लोग बेघर हो गए थे।
केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिले इसमें सबसे अधिक प्रभावित हुए थे। यहां के कुछ गांव पूरी तरह से बह गए थे।
पटनायक ने एक टूटे हुए पेड़ का बहुत बड़ा तना बनाया है जिससे आंसू गिर रहे हैं। यह कलाकृति चक्रवात के बाद पीछे छूट गए घावों को चिन्हित करती है।
सुदर्शन पटनायक कहते हैं, "मैंने एक टूटा हुआ पेड़ बनाया है जो हमें पिछली शताब्दी में उड़ीसा में आए भयंकर तूफान की याद दिलाता है। मैंने एक रोता हुआ टूटा पेड़ बनाया है जो चक्रवात के बाद पीछे छूटी तबाही को दिखाता है। मैंने पेड़ की जड़ों में चक्रवात के शिकार बने लोगों को दिखाया है।"
पटनायक और उनके छात्रों ने बुधवार को यह कलाकृति बनाई थी। इसके लिए उन्होंने पांच टन रेत का उपयोग किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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