वाजपेयी के बाद मनमोहन ने भी पाकिस्तान की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया (राउंडअप इंट्रो-1)

मुंबई हमले की बरसी के एक महीना पहले मनमोहन सिंह ने घोषणा की कि जम्मू एवं कश्मीर में हिंसा व आतंक के युग का अंत हो रहा है और शांति चाहने वाले हर किसी शख्श से वह बात करने को तैयार हैं।

वाजपेयी द्वारा अप्रैल 2003 में दिए गए बयान को दोहराते हुए मनमोहन सिंह ने उर्दू में कहा, "दोस्ती का जो हाथ हमने आगे बढ़ाया है, उसे और आगे तक बढ़ाया जाना चाहिए। यह भारत और पाकिस्तान दोनों देश की जनता के हित में होगा।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं पाकिस्तान की सरकार और वहां की जनता का आान करता हूं कि उन्हें ईमानदारी और नेकनीयती दिखानी चाहिए। जैसा कि मैं इसके पहले कई बार कह चुका हूं कि यदि ऐसा होता है तो उन्हें हमारी प्रतिक्रिया के लिए इंतजार नहीं करना होगा।"

प्रधानमंत्री कश्मीर के अनंतनाग में दक्षिण कश्मीर और उत्तर कश्मीर को जोड़ने वाली रेल सेवा को हरी झंडी दिखाने के पहले एक विशाल जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।

मनमोहन सिंह ने कहा, "फलदायी संवाद के लिए आतंकवाद पर लगाम कसना जरूरी है।"

प्रधानमंत्री ने जनसमुदाय को उर्दू में संबोधित करते हुए चंद अल्फाज कहे, "कभी ऐसे भी मंजर आए है, तवारीख की नजरों में/ लम्हों ने खता की है, सदियों ने सजा पाई।"

प्रधानमंत्री ने परवेज मुशर्रफ का नाम लिए बगैर कहा कि वर्ष 2004-07 के बीच दोनों पड़ोसी देशों के बीच उपयोगी और फलदायी बातचीत हुई थी। इस दौरान कश्मीर समस्या के स्थायी हल सहित सभी मसलों पर बातचीत हुई थी।

उन्होंने कहा कि 60 साल बाद दोनों देशों के लोग नियंत्रण रेखा के पार बस पर सवार होकर जा सके थे। विभाजित परिवारों का पुनर्मिलन हुआ था और सीमा के आर-पार व्यापार शुरू हो गया। पाकिस्तानियों को जारी होने वाले वीजा की संख्या दोगुनी हो गई और दोनों मुल्कों में रेल संपर्क भी फिर से स्थापित हुआ।

इस दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुईं। हालांकि इन सभी उपलब्धियों की दिशा में आतंकवादी गतिविधियों से बाधा पहुंची। सिंह ने कहा कि आतंकवादी दोनों देशों के बीच स्थायी दुश्मनी चाहते हैं। आतंकवादियों ने एक शांतिपूर्ण और परोपकारी धर्म का दुरुपयोग किया है। नफरत के दर्शन के लिए यहां कोई जगह नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ युद्ध को निर्णायक अंत तक पहुंचाने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि वे अराजकीय ताकतें (नॉन स्टेट एक्टर) भी हैं तो भी पाकिस्तान सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह उनके शिविर नष्ट करे और उनका बुनियादी ढांचा ध्वस्त कर डाले। उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वालों को अपने जघन्य कृत्यों की कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, "दहशतगर्दी का इस्तेमाल सियासती मकसद के लिए नहीं किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा, "दहशतगर्दी का असली चेहरा क्या है, यह पाकिस्तानी अवाम खुद अपनी आंखों से देख रहा है।" उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को नेक इरादों के साथ भारत का साथ देना चाहिए।

जम्मू एवं कश्मीर के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले किसी भी पक्ष से सरकार बातचीत के लिए तैयार है। सिंह ने कहा कि भारत ऐसे किसी भी पक्ष के साथ बातचीत का इच्छुक है जिसके पास कश्मीर में शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए सार्थक विचार हों। जम्मू एवं कश्मीर की राजनीतिक एवं आर्थिक समस्याओं को हल करने में हम सभी वर्गो के लोगों को साथ लेना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें पक्का यकीन है कि पाकिस्तानी अवाम का एक बड़ा हिस्सा भारत के साथ अच्छा और सहयोगी रिश्ता चाहता है। वे लोग स्थायी शांति चाहते हैं और हम भी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने वर्ष 2004 में जब पाकिस्तान की ओर से दोस्ती का हाथ बढ़ाया था तो उसकी वजह कोई कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सीमा पर व्यापार की सुविधाएं नाकाफी हैं। बैंकिंग चैनल नहीं हैं। व्यापार मेले आयोजित नहीं होते। व्यापार योग्य वस्तुओं की सूचियां बढ़ाने की जरूरत है। यात्रा की इजाजत मिलने में समय लगता है। भारत और पाकिस्तान के कैदी एक-दूसरे की जेलों में सजा पूरी होने के बाद भी वर्षो से बंद हैं।

उन्होंने कहा कि ये सभी मानवीय मसले हैं जिनके समाधान के लिए पाकिस्तान का सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत, पाकिस्तान सरकार के साथ इन मसलों सहित सभी मुद्दों पर बातचीत करने को राजी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इससे व्यापारियों, विभाजित परिवारों, कैदियों और यात्रियों को लाभ होगा। लेकिन रचनात्मक बातचीत के लिए जरूरी है कि आतंकवाद पर काबू पाया जाए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में स्थानीय निकायों के चुनाव जल्द कराए जाने चाहिए ताकि विकास योजनाओं में जनता की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने युवाओं से एक नए कश्मीर के निर्माण में योगदान देने को कहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह युवकों की हताशा समझ सकते हैं लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। उन्होंने युवाओं से अनुरोध किया कि वे अपने भविष्य के बारे में रचनात्मक ढंग से सोचें।

इस मौके पर अपने संबोधन में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में जम्मू एवं कश्मीर का एक विशेष स्थान है। गांधी ने कहा, "समस्याएं तो हमेशा रहेंगी, लेकिन ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसे बातचीत के जरिए न सुलझाया जा सके।"

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने राज्य में सुरक्षा हालात में सुधार को रेखांकित करने के लिए ही जनसमूह को संबोधित करने के लिए बुलेट प्रूफ स्क्रीन का इस्तेमाल नहीं किया है। अब्दुल्ला ने भी कश्मीर समस्या के स्थायी हल पर जोर दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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