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वैचारिक अस्पृश्यता के खिलाफ हैं संघ प्रमुख

भागवत ने पुस्तक विमोचन के एक कार्यक्रम में कहा कि लोग भले ही आरएसएस की विचारधारा से असहमत हों लेकिन अंतत: सभी भारतीयों को मोटे तौर पर देश के भविष्य को लेकर एकमत होना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश को पश्चिम का अनुसरण नहीं करना चाहिए। इसकी जगह उसे विकास की मूल रूपरेखा तैयार करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें बेरहम होकर आत्मनिरीक्षण करना होगा।"

भागवत ने इससे पहले आरएसएस के मुखपत्र पांचजन्य के पूर्व संपादक तरुण विजय द्वारा लिखित पुस्तक 'इंडिया बैटल्स टू विन' का विमोचन किया।

भारत और चीन के बीच हाल ही में चले शब्दवाण पर भागवत ने कहा कि देश को 1962 के युद्ध की गलतियों से सबक सीखना चाहिए।

उन्होंने कहा, "यद्यपि कि हम विस्तारवाद की नीति पर विश्वास नहीं करते लेकिन देश को इतना समर्थ होना सुनिश्चित करना चाहिए कि उसे कोई धमकी न दे सके।"

पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर भागवत ने चिंता जताई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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