भारत और पाकिस्तान के लिए मैत्री और सहयोग जरूरी : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कश्मीर में बुधवार को अनंतनाग को काजीगुण्ड से जोड़ने वाले 18 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग का उद्धाटन करने से पहले जनसमुदाय को उर्दू में संबोधित करते हुए चंद अल्फाज कहे, "कभी ऐसे भी मंजर आए तारीख की नजर में/लम्हों ने खता की और सदियों ने सजा पायी।"

वर्ष 2004-07 के बीच दोनों पड़ोसी देशों के बीच उपयोगी और फलदायी बातचीत हुई। इस दौरान कश्मीर समस्या के स्थायी हल समेत सभी मसलों पर बातचीत हुई।

उन्होंने कहा कि 60 साल बाद दोनों देशों के लोग नियंत्रण रेखा के पार बस के जरिए जा सके। विभाजित परिवारों का पुनर्मिलन हुआ और सीमा के आर-पार व्यापार शुरू हो गया।ोाकिस्तानियों को जारी होने वाले वीजा की संख्या दुगनी हो गई और दोनों मुल्कों में रेल संपर्क भी फिर से स्थापित हुआ।

इस दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुईं। हालांकि इन सभी उपब्धियों की दिशा में आतंकवादी गतिविधियों से बाधा पहुंची।उन्होंने कहा कि आतंकवादी दोनों देशों के बीच स्थायी दुश्मनी चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ युद्ध को निर्णायक अंत तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मैत्री और सहयोग भारत और पाकिस्तान के हित में है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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