भारत चर्चा को राजी, पर आतंकी संगठनों का सफाया जरूरी : मनमोहन (लीड-1)

जम्मू एवं कश्मीर में अनंतनाग-काजीगुण्ड रेल लाइन के उद्घाटन के अवसर पर एक समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि वे गैर राज्यीय ताकतें (नॉन स्टेट एक्टर) भी हैं तो भी पाकिस्तान सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह उनके शिविर नष्ट करे और उनका बुनियादी ढांचा ध्वस्त कर डाले। उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने वालों को अपने जघन्य कृत्यों की कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, "दहशतगर्दी का इस्तेमाल सियासती मकसद के लिए नहीं होना चाहिए।" उन्होंने कहा, "दहशतगर्दी का असली चेहरा क्या है यह पाकिस्तानी अवाम खुद अपनी आंखों से देख रहा है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान को नेक इरादों के साथ भारत का साथ देना चाहिए और पाकिस्तान में मौजूद व सक्रिय सभी आतंकवादी संगठनों का सफाया करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पाकिस्तान सरकार इन आतंकवादी संगठनों के खिलाफ जारी कार्रवाई को निर्णायक अंत पहुंचाएगी। उसे इन आतंकवादी संगठनों का सफाया कर देना चाहिए चाहे वे कहीं भी सक्रिय हों या उनका कोई भी गुमराह मकसद क्यों न हो।

आतंकवाद के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले किसी भी पक्ष से सरकार बातचीत के लिए तैयार है। सिंह ने कहा कि भारत ऐसे किसी भी पक्ष के साथ बातचीत के इच्छुक हैं जिसके पास कश्मीर में शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए साथर्क विचार हों। जम्मू एवं कश्मीर की राजनीतिक एवं आर्थिक समस्याओं को हल करने में हम सभी वर्गो के लोगों को साथ लेना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें पक्का यकीन है कि पाकिस्तानी अवाम का एक बड़ा हिस्सा भारत के साथ अच्छे और सहयोगी रिश्ते चाहता है। वे लोग स्थायी शांति चाहते हैं और हम भी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने वर्ष 2004 में जब पाकिस्तान की ओर से दोस्ती का हाथ बढ़ाया था तो उसकी वजह कोई कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत थी। उन्होंने कहा कि 2004-07 के बीच दोनों पड़ोसी देशों के बीच उपयोगी और फलदायी बातचीत हुई। इस दौरान कश्मीर समस्या के स्थायी हल समेत सभी मसलों पर बातचीत हुई।

उन्होंने कहा कि 60 साल बाद दोनों देशों के लोग नियंत्रण रेखा के पार बस के जरिए जा सके। विभाजित परिवारों का पुनर्मिलन हुआ और सीमा के आर-पार व्यापार शुरू हो गया। पाकिस्तानियों को जारी होने वाले वीजा की संख्या दुगनी हो गई और दोनों मुल्कों में रेल संपर्क भी फिर से स्थापित हुआ।

इस दौरान कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुईं। हालांकि इन सभी उपब्धियों की दिशा में आतंकवादी गतिविधियों से बाधा पहुंची।

उन्होंने कहा कि आतंकवादी दोनों देशों के बीच स्थायी दुश्मनी चाहते हैं। आतंकवादियों ने एक शांतिपूर्ण और परोपकारी धर्म का दुरुपयोग किया। नफरत के दर्शन की यहां कोई जगह नहीं है।

उन्होंने कहा कि सीमा पर व्यापार की सुविधाएं नाकाफी हैं। बैंकिंग चैनल नहीं हैं, व्यापार मेले आयोजित नहीं होते, व्यापार योग्य वस्तुओं की सूचियां बढ़ाने की जरूरत है। यात्रा की इजाजत मिलने में समय लगता है। जेलों में भारत और पाकिस्तान के कैदी एक-दूसरे की जेलों में सजा पूरी होने के बाद भी वर्षो से बंद हैं।

उन्होंने कहा कि ये सभी मानवीय मसले हैं जिनके समाधान के लिए पाकिस्तान का सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत, पाकिस्तान सरकार के साथ इन मसलों समेत सभी मुद्दों पर बातचीत करने को राजी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इससे व्यापारी, विभाजित परिवारों, कैदियों और यात्रियों को लाभ होगा। लेकिन रचनात्मक बातचीत के लिए जरूरी है कि आतंकवाद पर काबू पाया जाए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में स्थानीय चुनाव जल्द कराने चाहिए ताकि जनता की विकास की योजनाओं में भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने युवाओं से एक नए कश्मीर के निर्माण में योगदान देने को कहा। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह युवकों की हताशा समझ सकते हैं लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। उन्होंने युवाओं से अनुरोध किया कि वे अपने भविष्य के बारे में रचनात्मक ढंग से सोचे।

उन्होंने आतंकवाद की वजह से राज्य छोड़ कर चले गए कश्मीर व्यावसायियों से वापस लौटने का अनुरोध किया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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