कश्मीर में हड़ताल से जनजीवन प्रभावित

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में भारतीय सेना के आगमन के विरोध में मंगलवार को आम हड़ताल आयोजित की गई है.
उल्लेखनीय है कि 1947 में पाकिस्तानी कबायलियों से मुक़ाबले के लिए भारतीय सेना कश्मीर में पहुँची थी.
भारत प्रशासित कश्मीर के अधिकतर हिस्से में हड़ताल के कारण कारोबार ठप है और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई है.
संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप के बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच युद्धविराम हुआ था और इस हिस्से को नियंत्रण रेखा के माध्यम से बांट दिया गया था.
अलगाववादियों की माँग है कि कश्मीर के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिया जाना चाहिए.
कश्मीर में दो दशक पहले भारतीय शासन के ख़िलाफ़ सशस्त्र संघर्ष शुरू हुआ था, माना जाता है है इसे पाकिस्तान ने हवा दी थी.
अब तक इस संघर्ष में 50 हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत और पाकिस्तान से कश्मीरी अवाम के इच्छा को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को सुलझाने को कहता रहा है.
इधर बुधवार को भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दोदिवसीय यात्रा पर कश्मीर घाटी पहुँच रहे हैं.
वो अलगाववादियों से सरकार के साथ बातचीत का प्रस्ताव कर सकते हैं.
लेकिन कई अलगाववादी नेताओं का कहना है कि भारत-पाकिस्तान और भारत सरकार के साथ कश्मीरी नेताओं की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला है.
उनकी मांग है कि भारत, पाकिस्तान और कश्मीरी प्रतिनिधियों को बातचीत कर इस मसले का हल ढूँढना चाहिए. लेकिन भारत त्रिपक्षीय वार्ता के पक्ष में नहीं है.
एक प्रमुख अलगाववादी नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वो भारत सरकार के साथ बातचीत को तैयार हैं लेकिन एक अन्य नेता शब्बीर शाह ने सार्वजनिक रूप से उनके इस रुख़ का विरोध किया है.
साथ ही कट्टरवादी नेता माने जाने वाले सैयद अली शाह गीलानी भी बातचीत के विरोध में हैं.


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