पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए : ममता (लीड-2)

गत 30 जुलाई को लालगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई के दौरान पश्चिमी मिदनापुर जिले से अपहृत हुए बंगाल पुलिस के दो कांस्टेबलों के बारे में जानकारी मांगने के लिए मंगलवार को उनके परिजनों के साथ केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम से मुलाकात करने आई ममता ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "हम लोकतांत्रिक व्यवस्था चाहते हैं। हम लोगों का मत चाहते हैं। पश्चिम बंगाल सरकार को पहले बर्खास्त किया जाना चाहिए और फिर वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि वह बतौर तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष संवाददाताओं से बातचीत कर रही हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य को 'हत्यारा' बताया और नक्सलियों को उनकी संतान।

उन्होंने कहा, "वह हत्यारे मुख्यमंत्री हैं। नक्सली उनके बच्चे हैं। मैं नहीं मानती कि मार्क्‍सवादी और नक्सली अलग हैं।"

ममता ने कहा, "पश्चिम बंगाल में राज्य प्रायोजित आतंकवाद है। मार्क्‍सवादी आरोप लगा रहे हैं कि नक्सली उनके शिविरों से हथियार लूट रहे हैं। रोजाना हत्या की खबरें आती हैं। मार्क्‍सवादियों के शिविरों में हथियार रखे जाते हैं। नक्सलियों के साथ मिलकर वे क्षेत्रों पर अपना कब्जा जमा रहे हैं।"

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन नहीं लगाए जाने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि क्या पश्चिम बंगाल अपवाद है।

ममता ने यह आरोप भी लगाया कि उनके और उनकी पार्टी नेताओं के टेलीफोन टेप किए जा रहे हैं।

उन्होंने भट्टाचार्य पर देश को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।

ममता ने कहा, "अपहृत दोनों कांस्टेबलों के परिवार के सदस्यों के साथ मैंने गृह मंत्री से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वह इस घटना से परेशान हैं और उतने ही चिंतित हैं जितने कि हम हैं। कानून-व्यवस्था हालांकि राज्य का विषय है, बावजूद इसके उन्होंने हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।"

उल्लेखनीय है कि गत 30 जुलाई को पश्चिमी मिदनापुर जिले से कंचन गोराई और शब्बीर अली मुल्लाह को नक्सलियों ने अगवा कर लिया था। दोनों के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।

गत शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान दोनों कांस्टेबलों के मारे जाने के संबंध में एक बयान दिया था। उनके इस बयान से पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई। मुख्यमंत्री और अधिकारियों ने हालांकि बाद में स्पष्ट किया कि उनका बयान दोनों कांस्टेबलों के संदर्भ में नहीं था।

मुख्यमंत्री पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए बनर्जी ने कहा, "मुख्यमंत्री ने देश को गुमराह किया है। उन्होंने सच्चाई को तोड़मरोड़ कर पेश किया और जनता तथा अपहृत पुलिसकर्मियों के परिवारवालों को गुमराह किया। यह चिंता की बात है।"

बनर्जी ने यह स्पष्टीकरण भी मांगा कि नक्सलियों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई के दौरान इन दोनों पुलिसकर्मियों को अगवा कैसे कर लिया गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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