आरबीआई ने बढ़ाई एसएलआर, मौद्रिक समीक्षा नीति का स्वागत (राउंडअप)
आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने मुंबई में वाणिज्यिक बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के समक्ष समीक्षा नीति जारी करते हुए कहा, "हमेशा की तरह आरबीआई कीमतों की स्थिरता सुनिश्चित करने और मुद्रास्फीति को बढ़ने से रोकने के लिए उपाय करेगा।" उन्होंने चालू वित्त वर्ष में विकास दर छह फीसदी रहने के साथ मार्च तक मुद्रास्फीति की दर 6.5 फीसदी तक पहुंचने की संभावना जताई।
इस बीच नई दिल्ली में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि आरबीआई द्वारा मौद्रिक नीति की समीक्षा आशा के अनुकूल है और यह सरकार की राजकोषीय नीति के अनुरूप काम कर रही है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "राजकोषीय और मौद्रिक दोनों नीतियों में काफी समानता है।"
वित्त मंत्री ने कहा, "दरों के बारे में रिजर्व बैंक के साथ पहले चर्चा की गई थी। कुछ दिन पहले आरबीआई के गवर्नर मुझसे मिले थे। हमने चर्चा की थी और उन्होंने संकेत दिया था कि दरों में कोई बदलाव नहीं होगा।"
सुब्बाराव ने कहा, "वैश्विक स्तर पर कमोडिटी की कीमतों और घरेलू स्तर पर मांग व आपूर्ति के बीच संतुलन को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के अंत तक थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 6.5 फीसदी तक पहुंच जाएगी।" इससे पहले आरबीआई ने मार्च के अंत तक मुद्रास्फीति की दर पांच फीसदी तक पहुंचने का अनुमान लगाया था।
सुब्बाराव ने कहा, "आरबीआई हमेशा से मूल्यों में स्थिरता सुनिश्चित करने और मुद्रास्फीति की दर पर काबू पाने का काम करता है।"
उद्योग जगत ने मौद्रिक समीक्षा नीति का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि आर्थिक मंदी से निपटने के लिए प्रदान किया गया प्रोत्साहन पैकेज अभी जारी रहेगा।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "रेपो और रिवर्स रेपो दरों को अपरिवर्तित रखने का रिजर्व बैंक का कदम सही दिशा में है।"
बनर्जी ने कहा, "कुछ माह पहले प्रदान किए गए मौद्रिक प्रोत्साहन को बरकरार रखने का कदम बुद्धिमत्ता पूर्ण है। वित्तीय पैकज के साथ प्रदान किए गए मौद्रिक प्रोत्साहन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधार में अहम भूमिका निभाई है।"
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के अध्यक्ष हर्षपति सिंघानिया ने कहा, "रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा नीति से आर्थिक संकट से निपटने के लिए किए गए फौरी उपायों को धीरे-धीरे वापस लिए जाने का संकेत मिलता है। उम्मीद है कि ऐसे समय में जब औद्योगिक क्षेत्र में सुधार हो रहा है, मौद्रिक नीति ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।"
एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने कहा कि मौद्रिक नीति की घोषणा उम्मीद के अनुरूप है और इसमें विकास और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है।
एसोचैम की अध्यक्ष स्वाति पीरामल ने कहा, "मौद्रिक समीक्षा नीति से इस बात का संकेत मिलता है कि रिजर्व बैंक ने आने वाले दिनों में जारी ब्याज दरों में बदलाव करने का मन बना लिया है।"
वहीं मूडीज की शोध शाखा इकोनॉमी.काम के अर्थशास्त्री निखिलेश भट्टाचार्य का कहना है कि अभी लंबे समय तक नीतिगत दरों में वृद्धि की संभावना नहीं है।
मौद्रिक समीक्षा के प्रमुख बिंदु निम्न हैं :
-सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) की दर 24 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत की गई
-बैंक दर 6 प्रतिशत पर अपरिवर्तित
-रेपो दर 4.75 प्रतिशत पर अपरिवर्तित
-रिवर्स रेपो दर 3.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित
-नकद आरक्षित अनुपात पांच प्रतिशत पर अपरिवर्तित
-मार्च तक मुद्रास्फीति की दर 6.5 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान
-चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की विकास दर 6 फीसदी बने रहने का अनुमान
- तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए मुद्रास्फीति पर नजर
-तरलता की स्थिति पर नजदीकी निगाह और उसका सक्रिय प्रबंधन
- विकास के सहयोग से मूल्य व वित्तीय स्थिरता के दौर को बनाए रखना
-नवंबर के अंत तक कारपोरेट बॉन्ड में रेपो पर अंतिम दिशानिर्देश
-यूरो, येन, पाउंड-स्टर्लिग में भी फ्यूचर ट्रेडिंग की अनुमति
-केंद्र और राज्य सरकारों की कुल उधारी पूर्व में किए गए मूल्यांकन से 34 फीसदी ज्यादा
-म्यूचुअल फंडों के लिए विशेष रेपो, गैर बैंकिंग और आवास वित्त कंपनियां को छूट
- तीसरी तिमाही समीक्षा 29 जनवरी को
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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