देश के पुलिस तंत्र में तत्काल सुधार जरूरी : चिदंबरम (लीड-1)
'राष्ट्रीय पुलिस अभियान' विषय पर गृह मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक को संबोधित करते हुए चिदम्बरम ने कहा, "केंद्रीय अद्र्घ-सैनिक बलों की संख्या आठ लाख है। राज्य पुलिस बलों में दोनों ही स्तरों पर काफी संख्या में पद खाली पड़े हैं।"
चिदम्बरम ने कहा कि देश में पुलिस-जनसंख्या अनुपात में काफी अंतर है, जबकि इसे 220 होना चाहिए और यह अंतर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग है। उन्होंने पुराने उपकरणों तथा प्रशिक्षण की कमी जैसी अन्य समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया।
गृहमंत्री ने कहा कि राज्य में पुलिस बलों की संख्या में कमी तथा केंद्रीय अद्र्घ-सैनिक बलों पर निर्भरता संघीय ढांचे के लिए अच्छा संकेत नहीं है। राज्य अब परिस्थितियों की गंभीरता को समझ रहे हैं और पुलिसकर्मियों की भर्ती, प्रशिक्षण और आधुनिकीकरण पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। चिदम्बरम ने कहा कि देश में लंबे समय से पुलिस को नजरअंदाज किया जा रहा है, लेकिन अब राज्यों की पुलिस व्यवस्था में तुरंत सुधार की ज़रूरत है।
इस बैठक में राज्यसभा से डा. क़े मलईसामी, डा. क़े केशव राव, महमूद ए़ मदनी, मोहिन्दर सिंह मजीठा, रीशांग किशिंग तथा मोहम्मद अली खान और लोकसभा से डा. थोकचोम मैन्या, डा. मोनाजिर हसन, रतन सिंह अजनाला, खगन दास, एस़ अलगिरी, डी़ बी़ चंद्रगौडा, योगी आदित्य नाथ, कल्याण बनर्जी, वेणुगोपाल रेड्डी, ज़े पी. अग्रवाल, शीशराम ओला, इस्माइल हुसैन तथा महाबल मिश्र उपस्थित थे। इस बैठक में गृह राज्यमंत्रियों अजय माकन तथा मुल्लापल्ली रामचंद्रन सहित गृह सचिव, सीमा प्रबंधन सचिव, पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो के महानिदेशक भी उपस्थित थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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