उद्योग जगत ने किया मौद्रिक समीक्षा नीति का स्वागत
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को सांविधिक तरलता अनुपात (एसएलआर) में 100 आधार अंक की मामूली वृद्धि करने के अलावा अन्य नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रिजर्व बैंक ने औद्योगिक क्षेत्र में हो रहे सुधार के मद्देनजर जरूरी समर्थन देने के लिए अन्य दरों को अपरिवर्तित रखा है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "रेपो और रिवर्स रेपो दरों को अपरिवर्तित रखने का रिजर्व बैंक का कदम सही दिशा में है।"
बनर्जी ने कहा, "कुछ माह पहले प्रदान किए गए मौद्रिक प्रोत्साहन को बरकरार रखने का कदम बुद्धिमत्ता पूर्ण है। वित्तीय पैकज के साथ प्रदान किए गए मौद्रिक प्रोत्साहन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधार में अहम भूमिका निभाई है।"
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के अध्यक्ष हर्षपति सिंघानिया ने कहा, "रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा नीति से आर्थिक संकट से निपटने के लिए किए गए फौरी उपायों को धीरे-धीरे वापस लिए जाने का संकेत मिलता है। उम्मीद है कि ऐसे समय में जब औद्योगिक क्षेत्र में सुधार हो रहा है, मौद्रिक नीति ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी।"
एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने कहा कि मौद्रिक नीति की घोषणा उम्मीद के अनुरूप है और इसमें विकास और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है।
एसोचैम की अध्यक्ष स्वाति पिरामल ने कहा, "मौद्रिक समीक्षा नीति से इस बात का संकेत मिलता है कि रिजर्व बैंक ने आने वाले दिनों में जारी ब्याज दरों में बदलाव करने का मन बना लिया है।"
वहीं मूडीज की शोध शाखा इकोनॉमी.काम के अर्थशास्त्री निखिलेश भट्टाचार्य का कहना है कि अभी लंबे समय तक नीतिगत दरों में वृद्धि की संभावना नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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