आतंकवाद से मिलकर निपटेंगे भारत, रूस और चीन (लीड-2)
यहां विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने अपने समकक्षों चीन के यांग जेइची और रूस के सेर्गेइ लावरोव के साथ क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तृत वार्ता की। वैश्विक मंदी के बावजूद तीनों अर्थव्यवस्थाओं का प्रदर्शन बेहतर रहा है। दुनिया की तेजी से उभरती इन तीनों अर्थव्यवस्थाओं की यह नौवीं त्रिपक्षीय बैठक थी।
तीनों देशों में दुनिया का 20 फीसदी भूभाग और 39 प्रतिशत आबादी रहती है। तीनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, कृषि क्षेत्र में सहयोग पर जोर दिया। इसके अलावा दवा निर्माण क्षेत्र, बुनियादी ढांचे, सूचना प्रौद्योगिकी और ऊर्जा की सहयोग के क्षेत्रों के रूप में पहचान की।
यहां जारी एक संयुक्त घोषणा में कहा गया कि तीनों मंत्रियों ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, वैश्विक वित्तीय संकट, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में सुधार जैसे मुद्दों पर त्रिपक्षीय सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की।
दिन भर चली बैठक की समाप्ति पर जारी घोषणा पत्र में कहा गया है कि उनके बीच वृहद प्रतिबद्धताओं से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लोकतांत्रिककरण प्रक्रिया तथा विविध संस्कृतियों और सभ्याताओं को दर्शाने वाले बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के विकास में उनका प्रभाव बढ़ेगा।
कृष्णा ने चीन और रूस के विदेश मंत्रियों के साथ साझा संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमने आतंकवाद और देश की सरहद के पार होने वाले अपराध के खिलाफ त्रिपक्षीय कार्रवाई के बारे में विचार-विमर्श किया।"
येंग ने बैठक को 'बेहद उपयोगी ' बताया और कहा कि इससे त्रिपक्षीय सहयोग में 'नई प्रगति' होगी। उन्होंने जोर दिया कि क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर तीनों देशों का नजरिया समान है।
तीनों देश किसी न किसी प्रकार के आतंकवाद का सामना कर रहे हैं और अफगानिस्तान में बढ़ती तालिबानी हिंसा से चिंतित हैं। तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि को तत्काल अंतिम रूप देने का अनुरोध किया है।
वार्ता में अफगानिस्तान के हालात पर व्यापक चर्चा हुई। तीनों देशों ने लोकतांत्रिक, बहुलवादी और समृद्ध अफगानिस्तान के निर्माण के लिए उसके पुनर्निर्माण तथा वहां शांति और स्थायित्व कायम करने की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं पूरी करने की जरूरत पर जोर दिया।
चीन और रूस के विदेश मंत्रियों ने काबुल में इस महीने भारतीय दूतावास पर हुए हमले की निंदा की।
मुंबई हमलों का घोषणा पत्र में अलग से तो उल्लेख नहीं किया गया लेकिन संदर्भ स्पष्ट था। घोषणा पत्र में कहा गया है कि तीनों देशों के मंत्रियों ने सभी आतंकवादी हमलों के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति द्वारा सूचीबद्ध लोगों और समितियों के खिलाफ प्रतिबंधों पर जोर दिया।
नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में सुधारों पर चर्चा की।
जेइची ने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में और अधिक लोकतंत्रीकरण की वकालत करते हुए एक अधिक न्यायपूर्ण व समानता वाली अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की जरूरत जताई।
लावरोव ने अफगानिस्तान में बढ़ते आतंकवाद से संघर्ष के लिए सहयोग की आवश्यकता और अशांति के शिकार देश में शांति तथा स्थायित्व में तीनों देशों के समान हितों पर जोर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications