आर्थिक संस्थाओं में विकासशील देशों को मिले अधिक वोटिंग अधिकार
भारत, रूस और चीन के विदेश मंत्रियों की नौवीं बैठक की समाप्ति के बाद जारी एक संयुक्त बयान में उन्होंने जोर दिया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रशासन का भविष्य संतुलित प्रतिनिधित्व, समानता, परिणाम-मूलकता और उभरते हुए बाजारों तथा विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने में है।
तीनों देशों ने भविष्य में जी-20 शिखर सम्मेलनों को विकसित और विकासशील देशों में चक्रीय प्रणाली के आधार पर आयोजित कराने का मार्ग भी प्रशस्त किया।
विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा और उनके समकक्षों चीन के यांग जेइची तथा रूस के सेर्गेई लावरोव की बैठक में हुई चर्चा में वैश्विक आर्थिक संकट से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठे।
मंत्रियों ने संयुक्त घोषणा में जोर दिया कि अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार का एक सबसे बड़ा लक्ष्य विकसित और विकासशील देशों में वोटिंग अधिकारों का बराबर बंटवारा है।
पिछले महीने अमेरिका के पिट्सबर्ग में हुए जी-20 के तीसरे शिखर सम्मेलन के दौरान लिए गए फैसलों की प्रशंसा करते हुए तीनों विदेश मंत्रियों ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में कम से कम पांच प्रतिशत कोटा हिस्सेदारी और विश्व बैंक में कम से कम तीन प्रतिशत वोटिंग अधिकार शीघ्र हस्तांतरित करने को कहा।
त्रिपक्षीय बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुधारों, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे व्यापक मुद्दों के साथ ही क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications