2जी स्पेक्ट्रम आवंटन देश का सबसे बड़ा घोटाला : भाजपा (लीड-1)
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने पत्रकारों से कहा, "यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला है। यह एक बड़ा घोटाला है, इस पर कोई विवाद ही नहीं हो सकता।"
संचार मंत्री डी. राजा को हटाने की मांग करते हुए जेटली ने इस मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा हस्तक्षेप किए जाने की आलोचना की।
जेटली ने कहा, "जब इस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच चल रही है, ऐसे में मैं नहीं सोचता कि प्रधानमंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए था। जांच के बीच में ही प्रधानमंत्री ने उन्हें पाक साफ घोषित कर दिया।"
प्रधानमंत्री ने रविवार को घोटाले के आरोपों को गलत बताया था लेकिन पिछले सप्ताह संचार मंत्रालय के कार्यालय पर सीबीआई द्वारा की गई छापेमारी के बाद राजा के इस्तीफे की उठ रही मांगों के बारे में उन्होंने जवाब देने इनकार कर दिया था।
जेटली ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2007 में एक खुली लाइसेंस नीति की घोषणा की थी।
उन्होंने कहा, "एक अक्टूबर 2007 तक लाइसेंस के लिए आवेदन आमंत्रित करना तय हुआ था लेकिन अघोषित तरीके से यह तारीख 25 सितंबर 2009 कर दी गई और 25 सितंबर से एक अक्टूबर के बीच आए आवेदनों को खारिज कर दिया गया। खेल शुरू होने से पहले ही खेल के नियम बदल दिए गए।"
उन्होंने आरोप लगाया कि सभी 'अपनी' कंपनियों, जिनमें अधिकतर रियल एस्टेट से संबंधित हैं, से 25 सितंबर के पहले आवेदन मंगा लिए गए।
उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रम की नीलामी वर्ष 2007 के बाजार मूल्य की बजाय वर्ष 2001 में तय कीमत के आधार पर की गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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