हुड्डा ने स्वीकारा, पार्टी की अंतर्कलह का खामियाजा भुगतना पड़ा
लगातार दूसरी बार राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार संवाददाताओं से चर्चा में हुड्डा ने कहा, "हमने युद्ध तो जीत लिया मगर कुछ मोचरे पर हम हार गए।"
उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा, "पार्टी में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने अपना अस्तित्व बचाने के लिए पार्टी का नुकसान किया।"
उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव में 40 सीटें जीतने के बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, लेकिन वह सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत के आंकड़े से छह कदम दूर रह गई।
हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) की ओर से कांग्रेस सरकार को समर्थन देने की हुई पेशकश पर हुड्डा ने कहा, "वे एक समय कांग्रेस परिवार के ही सदस्य थे और और निजी कारणों से उन्होंने पार्टी छोड़ी। अब यदि वे कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन देने का प्रस्ताव रखते हैं तो हम उनका स्वागत करेंगे।"
उन्होंने कहा, "हमने जितनी उम्मीद की थी उसके अनुरूप हम सीटें नहीं जीत सके। बस एक लाइन में मैं यही कहूंगा कि हमने युद्ध तो जीत लिया लेकिन कुछ मोर्चे हम हार गए।"
बहरहाल, कांग्रेस को सभी सात निर्दलीय विधायकों के समर्थन के सहारे सरकार बनानी पड़ी है। हुड्डा ने रविवार को लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया ने उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 31 अक्टूबर तक का समय दिया है। बहुमत साबित करने के लिए हुड्डा ने 28 अक्टूबर को विधानसभा का एकदिवसीय सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल से अनुरोध किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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