विस्फोटों के दौरान ध्वस्त हो गया था असम पुलिस नेतृत्व : रिपोर्ट
गुवाहाटी, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। पिछले वर्ष 30 अक्टूबर को राज्य में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के समय राज्य पुलिस का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह ध्वस्त हो गया था और उसके बाद भड़की भीड़ की हिंसक वारदातों को नियंत्रित करने में विफल रहा। एक जांच रिपोर्ट में यह कहा गया है।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल 30 अक्टूबर को राजधानी गुवाहाटी में लगातार बम विस्फोटों से असम हिल गया था। इन धमाकों में करीब 100 लोगों की मौत हुई थी और 500 से अधिक घायल हो गए थे। राजधानी गुवाहाटी में तीन, बारपेटा, कोकराझार जिले में दो-दो और बोंगईगांव में एक विस्फोट हुआ था।
विस्फोट के बाद गुवाहाटी के एक स्थान पर पुलिस और दमकल विभाग के लोगों के देर से पहुंचने से नाराज भीड़ हिंसक हो गई। भीड़ ने पुलिस और दमकल की गाड़ियों में आग लगा दी और एंबुलेंसों पर हमला करने के साथ निजी संपत्ति को क्षति पहुंचाई।
विपक्षी दलों की आलोचना का शिकार हुई सरकार ने मामले की जांच के लिए राज्य के पूर्व पुलिस प्रमुख डी.एन.दत्त की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया था।
आईएएनएस को हासिल हुई दत्त जांच आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि संकट का सामना करने में शीर्ष पुलिस नेतृत्व व्यवस्था पूरी तरह विफल रही। अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जिम्मेदारी का पालन नहीं किया और वे अच्छी समन्वय वाली आपात योजना के अनुसार काम करने में विफल रहे।
रिपोर्ट के अनुसार गणेशगिरी इलाके में पहले विस्फोट के पूरे 20 मिनट बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंची, जबकि पुलिस स्टेशन घटनास्थल से केवल 500 मीटर दूर था। दमकल की दो गाड़ियां करीब 40 से 45 मिनट बाद पहुंची। इससे गुस्साई भीड़ और भी भड़क उठी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरा पुलिस नेतृत्व केवल दो विस्फोट स्थलों (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत और पान बाजार) पर एकत्र था। गणेशगिरी जैसे स्थलों पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहुंचे ही नहीं।
दत्त के अनुसार सुबह 11.30 बजे हुए विस्फोटों की सूचना मिलने के बावजूद तत्कालीन पुलिस महानिदेशक आर.एन.माथुर अपने कार्यालय में बने रहे और दोपहर दो बजे के पहले घटनास्थलों पर नहीं पहुंचे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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