महिलाओं और पुरुषों में समान होते हैं ह्रदयाघात के लक्षण

सीआईएचआर की क्लीनिकल शोधकर्ता मार्था मैके ने कहा, "मीडिया और बीमारियों की जानकारी देने वाली पत्रिकाओं में लिखा जाता है कि पुरुषों और महिलाओं में ह्रदयाघात के लक्षण अलग-अलग होते हैं लेकिन ऐसा नहीं है।"

सीआईएचआर के साथ-साथ ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ नर्सिग की शोधार्थी मैके के मुताबिक महिलाओं और पुरुषों को एक समान लक्षण के साथ ह्रदयाघात होता है। घात के दौरान आराम से कोई फायदा नहीं होता। इस दौरान छाती, गर्दन, जबड़े, कंधों, हाथों या पीठ में दर्द या जकड़न होती है।

इसके अलावा ह्रदयाघात के दौरान शरीर में जलन, दिमाग का भारीपन, जकड़न और रक्तचाप बढ़ने की शिकायत भी होती है। ये लक्षण महिलाओं और पुरुषों में लगभग एक समान पाए जाते हैं।

मैके को इस बात की हैरानी है कि जब ह्रदयाघात के लक्षणों की बात की जाती है, तब महिलाओं और पुरुषों में पाए जाने वाले लक्षणों को अलग क्यों कर दिया जाता है। आखिर क्यों इस बात का प्रचार किया जाता है कि ह्रदयाघात के वक्त पुरुषों की तरह महिलाओं के सीने में दर्द या जकड़न नहीं होती।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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