भारत महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार : अमेरिका (लीड-1)
वाशिंगटन, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। अमेरिका ने कहा है कि वह भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के तौर पर देखता है और धार्मिक आतंकवादियों से तीनों राष्ट्रों के साझा खतरे से निपटने के लिए पाकिस्तान को खुले और पारदर्शी तरीके से सहायता दे रहा है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने पाकिस्तान को 2.3 अरब डॉलर की रक्षा सहायता देने को मंजूरी दी है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रुक ने कहा कि पाकिस्तान को सैन्य सहायता संबंधी नए विधेयक में "केवल अमेरिकी जरूरतों" पर ध्यान दिया गया है और इसमें इस्लामाबाद पर शर्ते नहीं थोपी गई हैं।
अमेरिकी सैन्य सहायता का उपयोग भारत का मुकाबला करने से रोकने के लिए पाकिस्तान पर कड़ी शर्ते लगाने संबंधी मुद्दे पर किसी नए विवाद से बचने के लिए ऐसा कहा गया है। हॉलब्रूक ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, "पाकिस्तान पर कोई शर्त नहीं थोपी गई है लेकिन उसमें हमारी जरूरतें बताई गई हैं।"
उन्होंने कहा कि अब के सभी विधेयकों में और पिछले करीब 30 वर्षो से कांग्रेस अपनी जरूरतों को रखती है। यह निक्सन-किसिंजर युग से ही जारी है। हॉलब्रुक ने कहा कि पाकिस्तान में कुछ लोगों ने जानबूझ कर इसे विकृत तरीके से पेश किया है।
हॉलब्रुक ने कहा कि विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन अमेरिकी सहायता पर चर्चा के लिए कुछ दिनों के भीतर पाकिस्तान के दौरे पर जाएंगी। सुरक्षा कारणों से अमेरिकी अधिकारियों ने क्िंलटन के कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं दी है।
उधर विदेश विभाग के प्रवक्ता इयान केली ने कहा, "पाकिस्तान को हमारी सहायता साझा खतरे से निपटने के लिए है। आतंकवादियों से न केवल पाकिस्तान बल्कि अमेरिका और भारत को भी है।"
यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि नई सैन्य सहायता इस्तेमाल भारत के खिलाफ न हो सके? केली ने कहा, "हमारे पूरे पैकेज को पाकिस्तान की सहायता के लिए साझेदारी की भावना से तैयार किया गया है, जिससे वह चुनौतियों से निपट सके।"
उन्होंने कहा, "भारत के साथ हमारे संबंध रणनीतिक और महत्वपूर्ण है तथा हम पाकिस्तान को बहुत खुले और पारदर्शी तरीके से सहायता दे रहे हैं।"
उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को अमेरिकी कांग्रेस ने 680 अरब डॉलर के रक्षा खर्च को मंजूरी दी। इसमें पाकिस्तान को 2.3 अरब डॉलर की रक्षा सहायता भी शामिल है। परंतु इसके साथ ही यह शर्त भी शामिल है कि ओबामा प्रशासन हर छह महीने पर यह रिपोर्ट देगा कि पाकिस्तान तालिबान से लड़ाई के स्थान पर सैन्य सहायता का इस्तेमाल भारत के खिलाफ नहीं कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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