15 हजार सांपों को पकड़ने वाले की सांप के डंसने से मौत

सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स (एसपीसीए) के सचिव कर्नल जे.सी. खन्ना के अनुसार 37 वर्षीय रानडे पिछले दो दशक से सांप, सरीसृप और अन्य वन्यजीवों को पकड़ कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर छोड़ने का काम कर रहे थे।

खन्ना के अनुसार वह 136 वर्ष पुरानी संस्था एसपीसीए के एक अस्पताल के साथ पशु निरीक्षक के तौर पर जुड़े हुए थे।

भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के सदस्य खन्ना ने आईएएनएस से कहा, "शनिवार को रानडे ने कहीं से एक सांप को पकड़ा और अस्पताल परिसर में स्थित अपने घर में एक कंटेनर में रख दिया। रात के करीब 2.30 बजे वह सांप को कुछ भोजन देने गए लेकिन उसने रानडे पर हमला कर दिया।"

दुर्घटना के समय रानडे की पत्नी अपनी दो बेटियों (10 और तीन वर्षीय) के साथ मलाड में स्थित मायके गई हुई थीं।

रानडे के क्वार्टर से शोर सुनकर कुछ पड़ोसी और स्टाफ उनके घर की ओर दौड़े। वहां उन्होंने देखा कि रानडे अर्ध बेहोशी की अवस्था में दर्द से कराह रहे थे। तत्काल एंबुलेंस बुलाई गई और उन्हें नजदीकी अस्पताल ले जाया गया लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

खन्ना ने कहा कि रानडे को सांपों के मामले में विशेषज्ञता हासिल थी। उनके घर पर आपातकालीन वैक्सीन और पंप थे जिससे विष को निकाला जा सकता था। सभी सावधानी के बावजूद उनका इस तरह जाना दुखद है।

खन्ना ने रानडे परिवार को हरसंभव सहायता मुहैया कराने का आश्वासन दिया है।

मुंबई में जब भी लोग अपने घरों या आसपास सांप को देखते थे तो वह रानडे को ही याद करते थे। वर्ष 2005 में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने करीब 100 सांप पकड़े थे और उनका इलाज करने के बाद संजय गांधी नेशनल पार्क में छोड़ दिया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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