भारी बिल से त्रस्त उपभोक्ता को मिली अदालत से राहत
पुरुषोत्तम कालरा के नाम बीएसईएस की ओर से 129,107 रुपये और 91,471 रुपये के बिल भेज दिए गए। कालरा भ्रष्टाचार विरोधी संगठन नामक एक गैरसरकारी संगठन चलाते हैं।
न्यायमूर्ति गीता मित्तल ने पिछले सप्ताह पारित अपने अंतरिम आदेश में बिल की वसूली पर रोक लगा दी है और बीएसईएस को नोटिस जारी किया है।
कालरा ने कहा है कि उन्होंने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत दायर एक आवेदन के जरिए बीएसईएस की कार्यप्रणाली में अनियमितताएं पाई थी।
कालरा ने कहा, "चूंकि मैंने बीएसईएस की ओर से विभिन्न कॉलोनियों में घरों के बिल्कुल करीब लगाए गए ट्रांसफार्मरों के बारे में जानकारी के लिए बीएसईएस के खिलाफ आरटीआई दायर की थी कि ऐसा करने की अनुमति उन्हें किसने दी, इसलिए बीएसईएस ने मेरे घर पर छापा मारा। बीएसईएस को मेरे घर पर मीटरों में कोई गड़बड़ी नहीं मिली और उसकी प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया था कि मीटर की सील दुरुस्त हैं और उसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है, लेकिन मीटरों में दिखाई दे रही तारीख सही नहीं है। अब इसमें मेरी कोई गलती नहीं है, क्योंकि मीटर की सील दुरुस्त थी।"
इसके बाद बीएसईएस ने कालरा पर यह कहते हुए भारी बिल ठोक दिया कि वह मंजूर की गई मात्रा से अधिक बिजली खर्च कर रहे थे। इस पर कालरा ने बिल की वसूली पर स्थगन के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।
यद्यपि अदालत ने बिल की वसूली पर रोक लगा दी है लेकिन उसने कालरा से कहा है कि वह मामले के निपटारे तक नियमित उपभोग की जाने वाली बिजली के लिए भुगतान करते रहे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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